तिब्बत की आजादी के संघर्ष के 60 साल पूरे होने पर तिब्बत महिला संघ ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में 100 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया जिसमें महिलाओं समेत स्कूली बच्चे भी शामिल थे। इसमें तिब्बत की आजादी की लड़ाई में महिलाओं की भूमिका को याद किया गया। इसके अलावा कई सौ तिब्बतियों ने मंगलवार सुबह तीन मूर्ति मार्ग से चीनी दूतावास तक मार्च निकाला। जिसके बाद उन्हें चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन के पास हिरासत में ले लिए गया।
गौरतलब है कि 12 मार्च 1959 में तिब्बत के लोगों ने अपने देश पर चीन के अतिक्रमण के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की थी। महिला तिब्बत संघ की आउट स्टेशन कार्यकारी अधिकारी ताशी लहामो ने बताया की वो 11वें पांचेन लामा, गेडहोन चोकेई न्यिमा रिहाई की मांग कर रहे हैं। जिनका चीन द्वारा अपहरण कर लिया गया था। दलाई लामा के बाद पांचेन लामा तिब्बत के सबसे बड़े धार्मिक गुरु हैं।
संघ ने मांग की है कि संयुक्त राष्ट्र संघ और वैश्विक नेता, दलाई लामा के साथ मिलकर तिब्बत मसले पर बीच का रास्ता निकालें। वहीं चाइना से रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू किया जाए। उन्होंने तिब्बत में चीन द्वारा धार्मिक और बोलने की आजादी पर लगाई गई पाबंदी को भी हटाने कि मांग की है। भारत तिब्बत सहयोग मंच के पंकज गोयल और तिब्बती नेता ज्ञारी डोलमा ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। गोयल ने कहा कि भारत चीन के लिए बड़ा बाजार है। भारत को चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए।
गौरतलब है कि चीन से तिब्बत की आजादी की मांग को लेकर हो रहे तिब्बतियों का प्रदर्शन कई दिनों से जारी है। रविवार को उन्होंने केंद्रीय दिल्ली से जंतर मंतर तक और सोमवार को खान मार्केट से लोधी रोड स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ (भारत) के ऑफिस तक मार्च किया था।