बेटे और बेटी को एक-एक लाख रुपये देने के निर्देश
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित और निर्मम हत्या थी, जिसमें मृतक सुनीता के दोषी पति का मॉडल के साथ अवैध संबंधों को छिपाने और प्यार में बाधा बन रही पत्नी को मौत के घाट उतार दिया गया। यह मामला दुर्लभ श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए आरोपियों को मृत्युदंड नहीं दिया गया। अदालत ने पति मंजीत सहरावत, मॉडल एंजेल गुप्ता, धर्मेंद्र, दीपक, विशाल उर्फ जॉनी और शहजाद सैफी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार दिया था। सैफी, विशाल और धर्मेंद्र को आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी माना है। अदालत ने मृतक के दोनों बच्चों बेटा व बेटी को एक-एक लाख रुपये देने का आदेश दिया है।
लोक अभियोजक ने की मृत्युदंड की मांग
दोषियों के वकील ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि वे पहली बार अपराध में लिप्त हुए हैं। उनका आचरण ट्रायल के दौरान अच्छा रहा और वे अपने-अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। जबकि, अतिरिक्त लोक अभियोजक डॉ. राज रानी ने मृत्युदंड की मांग करते हुए कहा कि यह हत्या एक निर्दोष महिला की है। आरोप पत्र के अनुसार, मामला 29 अक्तूबर, 2018 की सुबह करीब आठ बजे का है, जब मृतक अपने घर से निकल रही थी। उस दौरान हमलावरों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। वहीं, जांच के दौरान पुलिस ने महिला के पति मंजीत और उसकी प्रेमिका एंजेल के अलावा अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
मृतक की डायरी ने खोले सारे राज
मृतक की बेटी ने पुलिस को वह डायरी सौंपी थी, जिसमें उसकी मां ने अपने पति मंजीत के मॉडल एंजेल के साथ अवैध संबंधों का जिक्र किया था। इस पूरे मामले में डायरी सबसे अहम सबूत साबित हुई। अदालत ने इस बात को स्वीकार किया कि यदि बेटी हिम्मत जुटाकर अपनी मां की डायरी को नहीं सौंपती, तो यह हत्या एक रहस्य बनकर ही रह जाती।