भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर प्रोपेगंडा और फर्जी खबरों को हवा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह न केवल जनता के बीच भ्रम पैदा कर रहा है, बल्कि दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स, फेसबुक और व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे कई पोस्ट और वीडियो में भड़काऊ सामग्री, पुराने फुटेज और मनगढ़ंत दावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि भारतीय सेना ने सीमा पर आक्रामक कार्रवाई की, जबकि जांच में पता चला कि यह वीडियो कई साल पुराना था और इसका मौजूदा स्थिति से कोई लेना-देना नहीं था।सोशल मीडिया पर प्रोपेगंडा फैलाने के लिए संगठित समूह काम कर रहे हैं, जो देश के लोगों की भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है, क्योंकि यह सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती है। सरकार ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है और सोशल मीडिया कंपनियों से ऐसी सामग्री को हटाने की अपील की है। गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए सरकार की ओर से आठ हजार फर्जी एक्स अकाउंट को ब्लाॅक करने के लिए सूची जारी की गई है।
असल युद्ध से पहले चालू डिजिटल युद्धसोशल मीडिया पर कई अकाउंट फर्जी जानकारी फैला रहे हैं जिसमें कहीं पाकिस्तान और कहीं भारतीय शहरों पर हमले की बात कही जा रही है।
दोनों देशों के बीच यह डिजिटल युद्ध न केवल आपसी अविश्वास को बढ़ा रहा है, बल्कि आम लोगों के बीच गलत धारणाएं भी बना रहा है। मीडिया विश्लेषक प्रिया शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रोपेगंडा का जवाब प्रोपेगंडा नहीं हो सकता। एक संयुक्त तंत्र बनाना चाहिए, जो गलत सूचनाओं को रोके और सत्य को सामने लाए।