भाजपा आलाकमान ने तीनों नगर निगमों के विलय का फैसला किया है। इसमें उसने स्वयं आगे आने के बजाय अपने पार्षदों को कमान सौंपी है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में बृहस्पतिवार को एक नगर निगम बनाने का प्रस्ताव लाया जा रहा है। इस प्रक्रिया को भाजपा आलाकमान के निर्देश पर शुरू होना बताया जा रहा है।
यह प्रस्ताव उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष मोहन भारद्वाज की ओर से लाया गया है। समिति में भाजपा का बहुमत होने के चलते प्रस्ताव पास होने में कोई अड़चन नहीं है। इसके बाद सदन में भी भाजपा पार्षद आसानी से इसेे हरी झंडी देे देंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव दिल्ली सरकार के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय पहुंचेगा, जहां इसको अमली जामा पहनाने का फैसला लिया जाएगा।
उन्होंने प्रस्ताव में निगम के विभाजन के दौरान दिए गए तथ्यों को जमीनी हकीकत से दूर करार दिया है। विभाजन के चलते तीनों निगम में अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था करनी पड़ी। इससे खर्च भी बढ़ा और जनता को दी जाने वाली सेवाएं भी प्रभावित हुईं। विभाजन के समय दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि न तो अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत होगी और न ही आर्थिक भार पड़ेगा, जबकि मौजूदा स्थिति यह है कि उत्तरी और पूर्वी दिल्ली निगम के पास तो कर्मचारियों को वेतन देने और वृद्धों को पेंशन देने के लिए भी राशि नहीं है।