दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि यह बड़ा हास्यास्पद लगता है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दाखिलों की काउंसलिंग के लिए कॉमन सॉफ्टवेयर नहीं बना पा रहे हैं। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब आईआईटी की ओर से पेश वकील ने बताया कि वह अभी सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है।
इसका परीक्षण होने के बाद दाखिलों में कॉमन काउंसलिंग की जाएगी। वहीं याचीकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर आईआईटी को किसी सॉफ्टवेयर को परखने में छह माह का वक्त लगेगा तो सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया में यह एक मजाक बन जाएगा।