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राजधानी में घातक होते चिकनगुनिया से आज एक और मौत, जानिए क्या है ये बीमारी

Wed, 14 Sep 2016 01:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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चिकनगुनिया - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली में चिकनगुनिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और घातक भी होता जा रहा है। राजधानी में चिकनगुनिया से तीन और मरीजों की मौत का मामला मंगलवार को सामने आया वहीं बुधवार को एक और मौत से मरने वालों की संख्या कुल 6 पहुंच गई है। मरने वाला शख्स गाज‌ियाबाद का है।
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बता दें क‌ि मंगलवार को दो मरीजों की मौत सर गंगाराम अस्पताल में और एक मौत निगम के बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में हुई है। इससे पहले भी गंगाराम अस्पताल में इस बीमारी से एक मौत हो चुकी है। जबकि डेंगू से आधिकारिक तौर पर इस वर्ष चार मौत हुई है। 

सर गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन डॉ.डी.एस.राणा ने बताया कि 12 सितंबर को द्वारका निवासी उदय शंकर (61) की मौत चिकनगुनिया से हो गई। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले अशोक चौहान (62) ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दोनों मरीजों को 11 सितंबर को गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दोनों की मौत हो गई।
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इलाज के दौरान हो रही लगातार मौत

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इससे पहले गाजियाबाद के रमेंद्र पांडे (65) की मौत चिकनगुनिया से हो गई थी। इधर, दिल्ली नगर निगम के सबसे बड़े अस्पताल बाड़ा हिंदू राव में इलाज के दौरान एक युवती की मौत चिकनगुनिया से हो गई।

ईशा (22) दिल्ली के कवि नगर इलाके की रहने वाली थी। ईशा को कुछ हृदय संबंधी परेशानी भी थी, जिसके बाद उसे चिकनगुनिया हो गया। ईशा की मौत इलाज के दौरान एक सितंबर को हुई है।

अब निगम की ओर से चिकनगुनिया से पहली मौत की पुष्टि की गई है। दिल्ली नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष अब तक चिकनगुनिया के 1724 और डेंगू के 1158 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं। अधिकारिक तौर पर अभी तक चिकनगुनिया से सिर्फ एक व डेंगू से चार लोगों की मौत बताई गई है।

जानिए क्या है चिकनगुनिया बीमारी

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चिकनगुनिया
चिकनगुनिया शब्द अफ्रीकी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है वह जो झुका दे...। यह एक वायरल बुखार है। एडीज एजिप्टी नाम के मच्छर, जिसे पीले बुखार का मच्छर भी कहते हैं, के काटने से यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। 

यह बीमारी अक्सर गर्म देशों में पाई जाती है, अधिकतर एशिया और अफ्रीका के देशों में यह बीमारी होती रही है। सबसे पहले चिकनगुनिया की शुरुआत 1952 में अफ्रीका के मंकोडे द्वीप में हुई, जो तंजानिया और मोजाम्बिक के बीचोबीच स्थित है।

खास बातें
1. चिकनगुनिया एक बार हो जाने पर जीवन में दोबारा होने की संभावना लगभग न के बराबर होती है
2. यह बीमारी सीधे एक मनुष्य से दुसरे मनुष्य में नहीं फैलती।
3. एक बीमार व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद फिर स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलती है।

चिकनगुनिया के लक्षण, बचाव और इलाज

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लक्षण 
मच्छर काटने के 2 से 7 दिनों के बाद चिकनगुनिया के लक्षण नजर आते हैं। शरीर पर चकते निकलना, जी मिचलाना, भूख कम लगना, कमजोरी आना, बुखार, खांसी, जुकाम, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द होना।

व्यक्ति इतना कमजोर हो जाता है कि कोई भी कार्य करने में असमर्थ पाता है। आमतौर पर चिकनगुनिया बुखार जानलेवा नहीं कहा जाता, कई मामलों में जानलेवा भी हो सकता है।

बचाव 
आस-पास पानी जमा नहीं होने दें। रुके हुए पानी में मच्छर पनपते हैं। खुद को मच्छरों से बचाना बहुत जरूरी है। रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। शरीर को ढककर रखें ताकि मच्छरों से बचे रहें।

उपचार  
इसके विषाणु नष्ट करने के लिए कोई दवा या टीका अब तक नहीं बनी है
जोड़ों व अन्य दर्द के लिए पेन किलर दवाएं दी जाती हैं
बुखार आने पर बुखार कम करने की दवाएं दी जाती हैं
आराम करना चाहिए और पेय पदार्थ खूब लेने चाहिए
कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह से ही लें
 
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जानिए क्या है डैंगू

Dengue - फोटो : Amar ujala
क्या है डेंगू ?
डेंगू वायरल बीमारी है, एडीज मच्छर के काटने से होता है, मच्छर काटने के पांच-छह दिन बाद बीमारी के लक्षण शुरु हो जाते हैं।

लक्षण:
बुखार अथवा तेज बुखार, मुंह सुखना, खूब प्यास लगना, सिर, आंख, मसल्स और जोड़ में दर्द होना, उल्टी होना, नाक से पानी
आना, सांस लेने में दिक्कत, पेद में दर्द,  मूंह और नाक से खून आना, स्किन से खून निकलने लगना आदि।

बचाव:
मच्छरों से अपने को बचाव करना चाहिए, अत्यधीक तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए, मरीज को अधिक से अधिक आराम करना,
चिकित्सक की सलाह पर ही दवा लेनी चाहिए।

 
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