लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे-धीरे आवश्यक सेवाओं को अनुमति मिलने लगी है, लेकिन राजधानी में साप्ताहिक बाजार लगाने की अनुमति अब तक नहीं मिली है। इसी प्रकार रेहड़ी-पटरी वालों को भी अभी तक काम की इजाजत नहीं मिली है। इससे उन तीन लाख परिवारों पर रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जो आजीविका के लिए सीधे तौर पर इन पर निर्भर करते हैं। दिल्ली सरकार ने साप्ताहिक बाजार लगाने की अनुमति दे दी थी, लेकिन केंद्र ने कोरोना संक्रमण बढ़ने की आशंका से इन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
रेहड़ी-पटरी का काम करने वालों के संगठन नासवी के अध्यक्ष अरबिंद सिंह ने बताया कि लॉकडाउन की सबसे गहरी चोट इन्हीं सबसे छोटे तबके के लोगों पर पड़ी है। ये लोग रोज कमाने-खाने वाले वर्ग से संबंध रखते हैं। कामकाज ठप होने से इनके सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है।
कुछ कामगर सब्जी इत्यादि बेचकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन उनकी स्थिति भी बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि अब तक इस वर्ग के लिए केंद्र या राज्य स्तर से किसी तरह का सहयोग नहीं दिया गया है, जबकि निर्माण मजदूरों, ऑटो चालकों इत्यादि के लिए नकद सहायता दी गई है। सरकार को इस सबसे छोटे तबके के लोगों के लिए भी विचार करना चाहिए।
नासवी की प्रमुख कार्यकर्ता संगीता सिंह बताती हैं कि जिंदगी बचाने के लिए अनेक रेहड़ी-पटरी कामगर अपने गांवों की तरफ पलायन कर गए हैं, तो यहां रहने वाले दिहाड़ी मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे हैं। यह काम भी उन्हें पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहा है, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।
इस समय भी बाजारों में काफी भीड़ देखी जा रही है, लेकिन इसके बाद भी रेहड़ी-पटरी वालों को कामकाज करने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि अन्य सेवाओं की तरह शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए इन्हें भी कामकाज करने की अनुमति दी जा सकती है।
फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव वीके बंसल कहते हैं कि साप्ताहिक बाजारों में काम करने वाले लोग सुबह माल उठाते हैं और उन्हें ही दिन भर बेचकर अपनी जिंदगी चलाते हैं। सरकार इनके लिए कोई उपाय नहीं कर रही है जिससे स्थिति बिगड़ गई है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार शादी-विवाह के बाजार से जुड़े लोगों को सालभर में केवल 60-70 दिनों का ही काम मिल पाता है। लेकिन इस साल पूरे विवाह के सीजन पर कोरोना और लॉकडाउन का असर रहा है। अब सरकार ने किसी भी विवाह समारोह में केवल 50 लोगों को ही शामिल होने की इजाजत दी है। यह बेहद गलत निर्णय है।
एरिया के आधार पर 25 वर्ग फीट पर एक व्यक्ति को अनुमति दी जा सकती है। ऐसा हो तो बड़े समारोहों में कम से कम 400 से 500 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है। इससे इस व्यापार से जुड़े लाखों लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
सीटीआई के अध्यक्ष ब्रजेश गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार को बिना किसी देरी के इन लोगों को कामकाज की अनुमति देनी चाहिए। उपराज्यपाल को समझना चाहिए कि होटल, जिम, साप्ताहिक बाजार से 25 लाख से ज्यादा लोगों का परिवार अपनी जिंदगी चलाता है।
अगर अन्य क्षेत्रों के लोगों को कामकाज की अनुमति दी जा सकती है तो इन क्षेत्रों के लोगों को भी एक स्टैंडर्ड का अनुसरण करते हुए कामकाज की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई अन्य राज्यों में जहां कोरोना संक्रमण की स्थिति ज्यादा गंभीर है, वहां भी इन व्यवसायों को काम करने की अनुमति मिल गई है, ऐसे में दिल्ली में इन पर पाबंदी लगाना उचित नहीं होगा।