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126 करोड़ रुपये का जमीन घोटाला: यीडा ने 3 कंपनियों को किया ब्लैक लिस्ट

Thu, 28 Jun 2018 10:24 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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मथुरा में 126 करोड़ रुपये की जमीन घोटाले से नाम जुड़ने पर तीन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इन कंपनियों को मिले विकास कार्यों के ठेकों को भी निरस्त करने की तैयारी है। 15 दिन में जवाब देने को कहा गया है।  

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यमुना प्राधिकरण के मुताबिक, लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी, रजनीश कार्पोरेट सर्विसेज और बीएम इंफ्रा कॉन्ट्रैक्टर का नाम मथुरा घोटाले से जुड़ रहा है। इस घोटाले की जांच रिपोर्ट में रजनीश सर्विसेज का नाम सीधे तौर पर जुड़ा है। एफआईआर में भी इस कंपनी का नाम है। सेक्टर अल्फा वन के पते पर पंजीकृत यह कंपनी प्रमोद यादव के नाम पर है। 

वह सपा सरकार में एक बड़े नेता के बेहद करीबी रहे मान सिंह यादव का साला है। इसी कंपनी में मान सिंह की पत्नी मीना यादव भी निदेशक भी हैं। प्राधिकरण ने इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। ब्लैक लिस्ट होने वाली दूसरी कंपनी लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन भी सेक्टर अल्फा वन के पते पर पंजीकृत है। इस कंपनी के मालिक बीबी गुप्ता पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता के बेहद करीबी बताए जाते हैं। 
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मथुरा घोटाले की जांच रिपोर्ट व एफआईआर में बीबी गुप्ता का भी नाम है। इसके भी विकास कार्यों के ठेकों को निरस्त करने की तैयारी है। तीसरी, कंपनी बीएम इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्रमोद कुमार यादव की है, जिसका नाम मथुरा घोटाले की जांच रिपोर्ट व एफआईआर में दर्ज है।  

यमुना प्राधिकरण, महाप्रंबधक, देवेंद्र बालियान ने कहा कि तीनों कंपनियों का नाम मथुरा घोटाले से जुड़ने के कारण ब्लैक लिस्ट किया गया है। इनको नोटिस भी जारी किया गया है। जवाब देने को 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद विकास कार्यों के ठेकों को निरस्त किया जाएगा।

मुखौटा कंपनियों की आड़ में लिए ठेके

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मुखौटा कंपनियों की आड़ में लिए ठेके
ब्लैक लिस्ट की गईं तीनों कंपनियों के नाम न सिर्फ जमीन घोटाले से जुड़ रहे हैं, बल्कि प्राधिकरणों से ठेका पाने में भी गड़बड़ी सामने आई है। मुखौटा कंपनियों की आड़ लेकर अधिकारियों से साठगांठ कर विकास कार्यों के तमाम ठेके हासिल किए हैं। मथुरा घोटाले की जांच रिपोर्ट में यह बात निकलकर आ रही है।

दरअसल, प्राधिकरणों में प्रावधान है कि किसी भी विकास कार्य का टेंडर तब खुलता है जब उसमें कम से कम तीन कंपनियां आवेदन करें, जो सबसे कम कीमत पर उस काम करने को तैयार होगा, उसे ही ठेका मिल जाएगा। 

मथुरा जांच घोटाले के आरोपियों ने कई मुखौटा कंपनियां बना ली थी। उनमें से दो कंपनियों से जानबूझकर अधिक रेट और मूल कंपनी से कम से रेट डाला जाता था। अधिकारियों से पहले से ही साठगांठ रहती थी, जिससे उसे ही टेंडर मिल जाता था। 

उस समय ऑनलाइन टेंडर की व्यवस्था नहीं थी। इन कंपनियों ने यह गड़बड़ी यीडा में ही नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा में भी बड़े पैमाने पर की है, जिसके चलते ग्रेनो की तरफ जांच की सूई घूम रही है। 
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15 गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त में कुछ ऐसे नाम सामने आए

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मथुरा जमीन घोटाले में कई ऐेसे नाम सामने आए हैं, जिनका काम सिर्फ दलाली करना था। किसानों से अधिकारियों को जमीन खरीदवाने में भूमिका निभाते थे। उसके बैनामे में गवाह बनते थे। वही दलाल किसानों को सात प्रतिशत आवासीय भूखंड दिलाने में अधिकारियों व किसानों के बीच की कड़ी थे।

कम समय में व अच्छी लोकेशन पर भूखंड लगवाने का किसानों को लालच देकर दलाल सक्रिय रहते थे। अधिकारियों व किसानों से मोटा कमीशन खाते हैं। अब ऐसे दलालों की सूची बन रही है। सूत्रों बताते हैं कि मथुरा, जहांगीरपुर, हाथरस व जेवर के 15 गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं, जो इन सभी में किसी न किसी भूमिका में हैं। 

कहीं किसानों से यीडा के नाम बैनामे में तो कहीं यीडा से किसानों को सात फीसदी भूखंड दिलाने में नाम सामने आ रहा है। इनकी सूची बनाकर जांच की तैयारी है, ताकि यह सामने आ सके कि घोटाले में उनकी क्या हिस्सेदारी है। इससे दलालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अधिगृहीत जमीन के एवज में प्राधिकरण किसानों को पांच व सात फीसदी आबादी भूखंड देता है।  
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