land scam ex ceo pc gupta
मुखौटा कंपनियों की आड़ में लिए ठेके
ब्लैक लिस्ट की गईं तीनों कंपनियों के नाम न सिर्फ जमीन घोटाले से जुड़ रहे हैं, बल्कि प्राधिकरणों से ठेका पाने में भी गड़बड़ी सामने आई है। मुखौटा कंपनियों की आड़ लेकर अधिकारियों से साठगांठ कर विकास कार्यों के तमाम ठेके हासिल किए हैं। मथुरा घोटाले की जांच रिपोर्ट में यह बात निकलकर आ रही है।
दरअसल, प्राधिकरणों में प्रावधान है कि किसी भी विकास कार्य का टेंडर तब खुलता है जब उसमें कम से कम तीन कंपनियां आवेदन करें, जो सबसे कम कीमत पर उस काम करने को तैयार होगा, उसे ही ठेका मिल जाएगा।
मथुरा जांच घोटाले के आरोपियों ने कई मुखौटा कंपनियां बना ली थी। उनमें से दो कंपनियों से जानबूझकर अधिक रेट और मूल कंपनी से कम से रेट डाला जाता था। अधिकारियों से पहले से ही साठगांठ रहती थी, जिससे उसे ही टेंडर मिल जाता था।
उस समय ऑनलाइन टेंडर की व्यवस्था नहीं थी। इन कंपनियों ने यह गड़बड़ी यीडा में ही नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा में भी बड़े पैमाने पर की है, जिसके चलते ग्रेनो की तरफ जांच की सूई घूम रही है।
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मथुरा जमीन घोटाले में कई ऐेसे नाम सामने आए हैं, जिनका काम सिर्फ दलाली करना था। किसानों से अधिकारियों को जमीन खरीदवाने में भूमिका निभाते थे। उसके बैनामे में गवाह बनते थे। वही दलाल किसानों को सात प्रतिशत आवासीय भूखंड दिलाने में अधिकारियों व किसानों के बीच की कड़ी थे।
कम समय में व अच्छी लोकेशन पर भूखंड लगवाने का किसानों को लालच देकर दलाल सक्रिय रहते थे। अधिकारियों व किसानों से मोटा कमीशन खाते हैं। अब ऐसे दलालों की सूची बन रही है। सूत्रों बताते हैं कि मथुरा, जहांगीरपुर, हाथरस व जेवर के 15 गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं, जो इन सभी में किसी न किसी भूमिका में हैं।
कहीं किसानों से यीडा के नाम बैनामे में तो कहीं यीडा से किसानों को सात फीसदी भूखंड दिलाने में नाम सामने आ रहा है। इनकी सूची बनाकर जांच की तैयारी है, ताकि यह सामने आ सके कि घोटाले में उनकी क्या हिस्सेदारी है। इससे दलालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अधिगृहीत जमीन के एवज में प्राधिकरण किसानों को पांच व सात फीसदी आबादी भूखंड देता है।