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तीन बांध बनने से हरियाणा और पंजाब के बीच बने रहेंगे सौहार्दपूर्ण संबंध

Sun, 27 Mar 2016 09:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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बिना रुकावट के नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मई में एसवाईएल से हरियाणा के हिस्से का 1.8 एमएएफ (मिलियन एकड़ फीट) में से 0.7 एमएएफ पानी उपलब्ध कराया जाए।
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यमुना नदी की सहायक नदियों पर 2.5 बिलियन क्यूबिक मीटर की स्टोरेज क्षमता के ये तीनों बांध (टोंस नदी पर केशाऊ, गिरी नदी पर रेणूका बांध व यमुदा नदी पर लखवार) बन जाएं तो हरियाणा को एसवाईएल के पानी की जरूरत ही नहीं होगी।

दोनों राज्यों के लोगों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए यह सबसे उचित और व्यावहारिक समाधान है। यह विचार गुडग़ांव सिटीजंस काउंसिल के प्रधान आरएस राठी, पब्लिक हेल्थ के सेवानिवृत इंजीनियर-इन-चीफ आरएन मलिक, जेसी यादव और सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर एमएस यादव ने शनिवार को अपने कार्यालय में एसवाईएल के मुद्दे पर आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान व्यक्त किए।
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सेवानिवृत इंजीनियर एमएस यादव ने कहा कि नवंबर 1966 में हरियाणा और पंजाब विभाजन के दौरान 60:40 के अनुपात से संपत्ति वितरण हुआ, जिसमें पंजाब की तीन नदियों के प्रवाह से हरियाणा को 3.5 एमएएफ पानी आवंटित किया गया।

हरियाणा को भाखड़ा शाखा प्रणाली के माध्यम से 1.7 एमएएफ पानी की सप्लाई हो रही है। 1.8 एमएएफ सतलुज-यमुना का शेष पानी प्राप्त करने के लिए लिंक नहर (एसवाईएल) प्रस्तावित किया गया था।

जीसीसी के प्रधान आरएस राठी ने कहा कि वर्तमान स्थिति में पंजाब में अपनी जमीन की सिंचाई करने के लिए तीन बड़ी नदियां हैं, जिसमें सतलुज, व्यास और रावी शामिल हैं। हरियाणा के पास बारहमासी नदी के रूप में केवल यमुना है।

साल के 9 सूखे महीनों के दौरान ताजे-वाला हेडवक्र्स पर पानी का प्रवाह केवल 1700-2500 क्यूसेक है जो बहुत कम है, बावजूद इसके इस पानी को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों के साथ भी साझा किया जाता है।
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इससे पता चलता है कि प्रदेश के गुडग़ांव जैसे बड़े शहरों को सिंचाई और जल आपूर्ति योजनाओं के लिए पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
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