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सेना भर्ती फर्जीवाड़े में पूर्व हवलदार समेत तीन गिरफ्तार, प्रत्येक आवेदक से लेते थे पांच से सात लाख

Wed, 27 Nov 2019 08:39 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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गौतमबुद्धनगर पुलिस ने सेना भर्ती में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। बादलपुर पुलिस और एंटी स्नैचिंग टीम ने छपरौला में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से बड़ी संख्या में सेना भर्ती से संबंधित दस्तावेज, मुहर, लैपटॉप और कार आदि बरामद किया गया है। 

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गिरोह का संचालन सेना से सेवानिवृत्त हवलदार कर रहा था। उसने बुलंदशहर में सेना भर्ती को लेकर कोचिंग सेंटर भी खोल रखा है। पुलिस ने पूरे मामले में आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस के दो हवलदार समेत 6 कर्मियों को वांछित बनाया है।

पुलिस कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि जिला बुलंदशहर के थाना अगौता अंतर्गत गांव अनेड़ा निवासी आदेश कुमार सेना से 2016 में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुआ। उसका भाई प्रमोद कुमार और गांव का ही रहने वाला लव कुमार पुत्र हरेंद्र सिंह ने बुलंदशहर में युवाओं को सेना में भर्ती कराने के लिए कोचिंग सेंटर खोल रखा है। 
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26 नवंबर को धूममानिकपुर चौकी प्रभारी सुनील कुमार यादव और एंटी स्नैचिंग टीम (एएसटी) को मुखबिर ने इस गिरोह की सूचना दी थी। इसके बाद गांव छपरौला के पास से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह सेना में भर्ती कराने वाले बोर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों से साठगांठ कर युवाओं को भर्ती कराते हैं। आवेक को भर्ती कराने का ठेका पांच से सात लाख रुपये में लेते थे। इसमें फिजिकल, मेडिकल पास कराने और वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी तीनों की होती थी। यदि किसी अभ्यर्थी की लंबाई कम रह जाती है तो उसके फर्जी निवास प्रमाण पत्र और सामान्य जाति प्रमाण पत्र पूर्वी भारत से तैयार कराए जाते थे। वहां एक सेंटीमीटर की लंबाई में छूट दी जाती है। लंबाई में और अधिक छूट या लाभ पाने के लिए उत्तराखंड से भी दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। पुलिस को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों की तहसील और सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालयों से कथित सत्यापित दस्तावेज मिले हैं। यूपी के फर्जी प्रमाण पत्र भी बड़े पैमाने पर तैयार कर रखे थे। 

प्रमोद पहले भी जा चुका है जेल
एसएसपी ने बताया कि सेना से रिटायर्ड आदेश कुमार का सगा भाई प्रमोद कुमार आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (एआरओ) के ही मामले में फतेहपुर जिले से गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। 

60 युवाओं को करा चुका भर्ती
मुख्य आरोपी आदेश कुमार ने बताया कि वह विभिन्न जिलों के करीब 60 युवाओं को सेना में फर्जी प्रमाण पत्र के माध्यम से नौकरी दिला चुका हैं। तीनों आरोपी तीन साल से इस धंधे में हैं।

आगरा, फतेहगढ़ के हवलदार समेत छह वांछित
एसएसपी ने बताया कि आदेश ने कुबूला है कि 2016 में सेवानिवृत्त होने के बाद वह लगातार सेना में हवलदारों के संपर्क में था। इसी कारण उसने एआरओ में तैनात कर्मियों में तगड़ी पैठ बना ली। पूछताछ में सामने आया कि अजीत उर्फ बग्गी एआरओ मेरठ, विक्की एआरओ मेरठ, सेंडी हवलदार एआरओ आगरा, विजय हवलदार एआरओ फतेहगढ़, सूबेदार दिवाकरन एआरओ बरेली, राहुल पांडे एआरओ वाराणसी से लंबी बात करता था। सभी की कॉल रिकार्डिंग मौजूद हैं। सभी को मामले में वांछित बनाया गया है। एसएसपी ने कहा कि सभी के विषय में जानकारी और साक्ष्य सेना को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उसके पश्चात सेना के अफसरों के स्तर से आंतरिक जांच और कार्रवाई होगी।

आरोपियों के पास से यह हुआ बरामद
आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, छह मोबाइल, नौ कोरे सामान्य निवास प्रमाण पत्र, दो रुपये वाली 24 रसीदी टिकट, विभिन्न जिलों के थाना व पोस्ट की सूची, विभिन्न जिलों से जारी स्थायी निवास व जाति प्रमाण पत्र की प्रतियां, विभिन्न जनपदों से सत्यापन के संबंध में बिना हस्ताक्षरित पत्र की प्रतियां, ओआईसी मिलिट्री हॉस्पिटल बरेली द्वारा जारी कांफिडेंशनल सूची, नॉमिनल रोल केंडिडेट सैंपल, कैंडिडेट की रिव्यू सर्टिफिकेट की प्रतियां, 38 आवेदकों के फोटो सहित एडमिट कार्ड और अंकतालिका, 22 के फिजिकल टेस्ट एडमिट कार्ड, मिलिट्री हॉस्पिटल बरेली की रिपोर्ट, 8 युवकों की एप्लीकेशन डिटेल्स, दो पैकेट फोटो तैयार करने वाले कागज, एक कार बरामद की गई है।

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