दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं ये फैसला आपके कानों के लिए काफी अच्छा है। अब आप सोच रहे होंगे कि पटाखे कम जलेंगे तो प्रदूषण में कमी आ सकती है लेकिन कानों के लिए क्या अच्छी बात है। तो बता दें कि पटाखे कम जलने से वायु प्रदूषण के साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा। हालांकि कई लोगों को अब भी ये संदेह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कितनी सख्ती से पालन होगा। आइए जानते हैं कि पटाखों में कमी से क्या-क्या फायदे होंगे खासतौर से हमारे कान के लिए...
सबसे पहले तो ये जानने की जरूरत है कि आवाज को मापा कैसे जाता है कितनी तेज आवाज इंसान के लिए सही है? जैसे सामान या दूरी को मापने के लिए किलोग्राम और मीटर का इस्तेमाल होता है वैसे ही आवाज को मापने के लिए डेसिबल(डीबी) का उपयोग किया जाता है। हम कितनी धीमी और कितनी तेज आवाज सुन सकते हैं इसके बीच के अनुपात को डेसिबल कहते हैं।
अब ये जानना जरूरी है कि विभिन्न तरह की मानवीय क्रियाओं से कितने लेवल की आवाजें निकलती हैं। इसके लिए बता दें कि एक सामान्य इंसान 0 डीबी से 140 डीबी तक की आवाजें सुन सकता है। 120 डीबी से लेकर 140 डीबी तक की आवाजें सामान्य इंसान के कान को दर्द पहुंचा सकती हैं।
बता दें कि अगर आवाज में 10 डीबी की भी बढ़ोतरी हो तो वो दस गुना आवाज बढ़ने के बराबर होती है। अगर आवाज की तीव्रता में दुगने की बढ़ोतरी होती है तो वह केवल 3 डीबी ही बढ़ता है। जैसे कि अगर एक ड्रिलिंग मशीन से 80 डीबी की आवाज आती है तो दो मशीन लगाने से सिर्फ 83 डीबी की आवाज आएगी।