सबसे ज्यादा विरोध सुशील गुप्ता के नाम पर है। कुछ समय तक कांग्रेस में रहे सुशील गुप्ता ने करीब 40 दिन पहले कांग्रेस से त्यागपत्र देने के लिए संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया था। उन्होंने दावा किया था कि वे राजनीति में रहते हुए समाज सेवा नहीं कर पा रहे।
वे परिवार के कर्तव्यों से मुक्त हो चुके हैं और अब शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। इसी दौरान बात उठी थी कि कांग्रेस के राज्यसभा भेजने से मना करने पर वे पार्टी छोड़ रहे हैं। वे इसके लिए 50 करोड़ रुपये तक देने को तैयार थे। अब उनके अचानक आप में जाने और राज्यसभा के लिए नामांकन से तब की बात ताजा हो गई है।
रही-सही कसर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने पूरी कर दी। माकन ने ट्वीट किया कि कांग्रेस छोड़ते समय सुशील गुप्ता ने कहा था कि राज्यसभा के लिए ऑफर है, इसलिए कांग्रेस छोड़ रहा हूं। यानी माकन के मुताबिक, कांग्रेस में रहते ही उनकी कहीं ‘डील’ हो गई थी।
कभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे योगेंद्र यादव ने भी सवाल व व्यंग्य करते हुए कहा है कि पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था तो मैने कहा था कि उन्हें कोई खरीद नहीं सकता।
गुप्ता को प्रत्याशी बनाने पर मैं क्या कहूं? हैरान हूं, स्तब्ध हूं और शर्मसार भी। यानी यादव भी ‘डील’ का इशारा कर रहे हैं। आप के शुभचिंतक राजनीतिक विश्लेषक अभय दुबे भी हैरान हैं। उनका कहना है कि आखिर आपकी राजनीति की यह कैसी परिभाषा शुरू हो गई।
150 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक को प्रत्याशी बनाकर गरीबों की पार्टी क्या संदेश देना चाहती है। इनकी उम्मीदवारी से लोकतंत्र कैसे समृद्ध होगा? यह नापाक गठजोड़ है। वैसे जानकारी के अनुसार, पीएसी की मीटिंग में भी इन नामों पर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन केजरीवाल के कारण चुप्पी साध ली गई। अल्पसंख्यक कोटे से किसी को टिकट न देना भी पार्टी को भारी पड़ सकता है।