रेल प्रशासन की कवायद अगर रंग लाई तो शताब्दी और राजधानी समते सभी महत्वपूर्ण रेल गाड़ियों में अतिरिक्त कोच लगेंगे। रेल प्रशासन होटल लोडेड कैपेबल डीजल लोकोमोटिव नामक एक ऐसा इंजन लेकर आया है। जिससे कोच में लाइट और एसी भी चलेगी। इससे ट्रेन में बिजली सप्लाई के लिए अलग से जेनरेटर कार लगाने की जरूरत नहीं होगी। इसकी जगह ट्रेनों में नए कोच लगाए जाएंगे।
रेल अधिकारियों की मुताबिक, रेलवे के बेड़े में फिलहाल दो इंजन शामिल किए जा रहे हैं। बुधवार को सफदरजंग रेलवे स्टेशन से इसे हरी झंडी दिखाई गई। इसकी सफलता का आकलन करने के बाद इन्हें धीरे-धीरे पारंपरिक इंजन की जगह लगाया जाएगा। अगर कोई व्यवहारिक अड़चन आती है तो इसमें सुधार भी किया जाएगा।
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि मौजूदा समय में शताब्दी, राजधानी, दुरंतो समेत सभी तेज रफ्तार और पूरी तरह वातानुकूलित रेल गाड़ियों में इंजन के अलावा दो जेनरेटर कार भी लगाने होते हैं। इस वजह से यात्रियों के लिए दो कोच की कमी करनी पड़ती है और करीब 150 यात्रियों का टिकट वेटिंग रह जाता है।
होटल लोडेड कैपेबल डीजल इंजन के आने से यह अड़चन खत्म हो गई है। ट्रेन में अलग से जनरेटर कार लगाने की जरूरत नहीं होगी। इस इंजन की इतनी क्षमता है, जिससे ट्रेन चलाने के साथ उसके सभी कोच में बिजली आपूर्ति की जा सके। इससे हाईप्रोफाइल ट्रेन में दो अतिरिक्त कोच लगाये जा सकेंगे।