औद्योगिक नगरी की आबोहवा बिगाड़ने में उद्योग नहीं बल्कि वाहन हैं सबसे ज्यादा जिम्मेदार। शहर के उद्योग इस मामले में दूसरे स्थान पर हैं। इतना ही नहीं फरीदाबाद एनसीआर का सबसे प्रदूषित शहर भी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
राजधानी से सटे फरीदाबाद में बद से बदतर हो चुकी आबोहवा शहरवासियों की हर सांस में जहर घोल रही है। पीएम 2.5 की न्यूनतम मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक होनी चाहिए, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट की मानें तो शहर में पीएम 2.5 की औसतन मात्रा 234 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक आंकी गई है, जो खराब स्थिति को दर्शाती है।
प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह बढ़ते वाहन हैं। रिपोर्ट के अनुसार 60 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों से हो रहा है, जबकि औद्योगिक नगरी की इंडस्ट्री की इसमें 30 फीसदी हिस्सेदारी है। नेशनल हाईवे सिक्स लेन प्रोजेक्ट के अलावा शहर में जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्य की वजह से 10 प्रतिशत प्रदूषण फैल रहा है।
शहर में सबसे ज्यादा प्रदूषण राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। इसके दोनों ओर 10 से 15 किलोमीटर तक हवा में सलफर डाईऑक्साइड और बेंजीन कैमिकल की मात्रा सबसे ज्यादा पाई गई है। इनकी वजह से एसिड रेन, त्वचा संबंधी बीमारियां, फसलों की सही तरीके से वृद्धि न होने और शारीरिक विकास में बाधा का खतरा मंडरा रहा है। प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक डॉ. एसके श्योराण के मुताबिक हाईवे से 20 किलोमीटर दाएं और बाएं प्रदूषण का स्तर कम है।