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महिला सेक्स वर्कर्स और 'गे' से जुड़ी है ये सच्चाई

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देश में फिमेल सेक्स वर्कर्स से ज्यादा गे समुदाय के लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं। एचआईवी संक्रमित होने वाले हाई रिस्क लोगों और इलाकों में नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) के साथ मिलकर एम्स के चिकित्सक ऐसे इलाकों में रहने वाले एचाआईवी पीड़ित लोगों पर एक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
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अध्ययन में एचआईवी पॉजिटिव लोगों के विहेवियर, रहन-सहन और खान-पान पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने वाले हैं। अध्ययन का काम पूरा कर लिया गया है और बहुत जल्द रिपोर्ट तैयार कर सार्वजनिक कर दी जाएगी।

नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) के साथ मिलकर काम करने वाले एम्स के चिकित्सकों ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के बिहेवियर, रहन-सहन और खान-पान पर अध्ययन किया जा रहा है।
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ये कहती है रिसर्च

करीब 20 लाख ऐसे लोगों से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अध्ययन के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो चौंकाने वाले हैं। मसलन रेड लाइट एरिया से ज्यादा सामान्य जगहों पर एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या ज्यादा मिले हैं।

उत्तर भारत में एचआईवी पॉजिटिव की संख्या घटी है।  हालांकि उत्तर प्रदेश के देवरिया, जौनपुर और आजमगढ़ में मरीजों की संख्या बढ़ी है। जून-2013 से अध्ययन जारी है जो इस वर्ष मई माह में पूरा हुआ है। अध्ययन को अंतिम रुप दिया जा रहा है इसके बाद रिपोर्ट जारी की जाएगी।

नाटो की रिपोर्ट के मुताबिक देश की आबादी का करीब .35 प्रतिशत लोग एचआईवी पॉजिटिव से पीड़ित हैं। 4.3 प्रतिशत गे एचआईवी पॉजिटिव हैं जबकि 2.67 प्रतिशत फिमेल सेक्स वर्कर्स ही एचआईवी पॉजिटिव हैं। 8.82 फीसदी किन्नर और 7.14 प्रतिशत वैसे लोग जो आईवी फ्लूड से नशे की दवा लेते हैं एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं।
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