कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
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दिल्ली के तीसरे सीरो सर्वे में राजधानी के सभी 11 जिलों से 17 हजार से ज्यादा सैंपल लिए गए हैं। इनमें सभी आयु, वर्ग, लिंग और अलग-अलग समुदाय के लोग शामिल किए गए हैं। इसके नतीजे जल्दी ही घोषित किए जाएंगे। तीसरा सीरो सर्वे ऐसे समय में किया गया है जब राजधानी में कोरोना के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ने शुरू हो गये हैं। शुक्रवार को राजधानी में लगभग तीन हजार नए केस सामने आए थे और पिछले 24 घंटों में 13 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय के एक अधिकारी के मुताबिक तीसरे सीरो सर्वे में पहले दो सर्वे से बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है। ज्यादा लोगों में एंटीबॉडी मिलने का अर्थ यह होगा कि दिल्ली के लोग कोरोना को बेहतर ढंग से मात दे रहे हैं। 27 जून से 10 जुलाई के बीच हुए पहले सीरो सर्वे में 21387 लोगों के सैंपल लिए गए थे जिनमें 22.86 फीसदी लोगों में कोरोना के एंटीबॉडीज पाए गए थे। जबकि एक अगस्त से सात अगस्त के बीच हुए दूसरे सीरो सर्वे में लगभग
15 हजार लोगों के सैंपल लिए गए थे। इस सर्वे में 29.1 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज विकसित पाए गए थे। इसमें महिलाओं में 32.2 फीसदी और पुरुषों में 28.3 फीसदी लोगों में कोरोना के एंटीबॉडीज पाए गए थे। हालांकि, सरकार की उम्मीद थी कि दूसरे सर्वे में लगभग 40 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज विकसित पाए जाएंगे। लेकिन परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे थे।
ज्यादा लोगों में एंटीबॉडीज मिलने का मतलब अधिकारी के मुताबिक सीरो सर्वे में ऐसे लोग शामिल किए जाते हैं जो पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिन्हें उनकी जानकारी में अभी तक कोरोना नहीं हुआ है। लेकिन सर्वे में ऐसे लोगों में एंटीबॉडीज मिलने का मतलब होता है कि ये लोग बिना जानकारी के भी कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हो गए। यह लोगों के अंदर कोरोना के प्रति ठीक होने की क्षमता को दिखाता है। ज्यादा लोगों में एंटीबॉडी मिलने का अर्थ हर्ड इम्यूनिटी की तरफ बढ़ने का इशारा होगा, लेकिन यह तभी माना जाएगा जब कम से कम 60 से 70 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी विकसित हो जाए।
इस समय क्या है स्थिति
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा है कि राजधानी में कोरोना के मामले बढ़ते दिख रहे हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि कोरोना नियंत्रण से बाहर हो गया है। उन्होंने कहा कि राजधानी में लगभग एक तिहाई मरीज दूसरे राज्यों के हैं। इसके बाद भी राजधानी में स्थिति नियंत्रण में है और अस्पतालों में सामान्य और आईसीयू बेड्स की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि राजधानी में कोरोना के मामले बढ़ने का कारण यह भी है कि राजधानी में कोरोना टेस्टिंग ज्यादा बढ़ाई जा रही है जिसके कारण ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।