मामले की जांच की जिम्मेदारी निरीक्षक विवेक मंडोला के नेतृत्व में सेंधमारी निरोधक दस्ता को सौंपी गई। पुलिस ने घटनास्थल के आस पास के सीसीटीवी कैमरे की जांच की। फुटेज में एक नकाबपोश आदमी और एक नकाबपोश महिला को शिकायतकर्ता के घर में घुसते हुए और बाहर निकलते हुए देखा गया। टीम ने 14 दिनों तक लगातार सीसीटीवी कैमरों के जरिए संदिग्धों का पीछा किया। जिसमें पता चला कि चोरों में से एक जो महिला के रूप में दिख रही थी, वह असल में एक पुरुष चोर था।
पुलिस ने फुटेज में दिख रहे आरोपी को मुखबिरों को दिखाया। उन लोगों ने आरोपी की पहचान सौरभ के रूप में की। पुलिस ने तकनीकी जांच कर डाबड़ी, मोहन गार्डन और रणहौला के उसके कई ठिकानों पर दबिश दी। शनिवार को पुलिस टीम को सौरभ के उत्तम नगर के अंबेडकर पार्क आने की जानकारी मिली, जहां पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से चांदी की पायल का एक जोड़ा, एक हैंडीकैम और पांच चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी से दस मामले सुलझाने का दावा किया है।
माता-पिता की मौत के बाद नशे की लत ने बनाया चोर
पूछताछ में सौरभ ने बताया कि वह मूलत: उत्तराखंड का रहने वाला है। उसके परिवार वाले काफी गरीब थे। वह बचपन में ही अपने परिजनों के साथ दिल्ली आ गया। उसने 9वीं कक्षा तक पढ़ाई की। 2015 में लंबी बीमारी के कारण उसके माता-पिता की मौत हो गई। जिसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी। इस दौरान वह इलाके में रहने वाले सुमित, सुनील और राहुल के संपर्क में आकर स्मैक का सेवन करने लगा।
इसलिए महिला के वेश में करता था चोरी
स्मैक की लत पूरी करने के लिए उसने चोरी और घरों में सेंधमारी करना शुरू कर दिया। उसे पहली बार 2022 में मोहन गार्डन थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद रणहौला थाना पुलिस ने हथियार रखने और चोरी के मामले में गिरफ्तार किया। हाल ही में वह जेल से रिहा हुआ था। वह सुमित के साथ डाबड़ी और उत्तम नगर में वारदात को अंजाम दिया। उसने बताया कि वह अपनी पहचान छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए महिला का वेश में वारदात को अंजाम दे रहा था।