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Delhi NCR News: टेलीकॉम-पुलिस अफसर बनकर करते थे डिजिटल अरेस्ट, पाकिस्तान से जुड़े तार

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- रोहिणी साइबर सेल ने मास्टर माइंड समेत तीन को दबोचा, 15 लाख से ज्यादा की ठगी
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- पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आरोपी पाकिस्तान में बैठे सरगना को सौंपते थे, इसके एवज में मिलता था कमीशन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले गैंग के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। रोहिणी जिला साइबर सेल ने टेलीकॉम और पुलिस अधिकारी बनकर एक शख्स को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने गैंग के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान कन्नौज यूपी निवासी 23 साल के अंकित, दलेल पुरवा कानपुर यूपी निवासी 24 साल के सैफ अंसारी और मीठापुर दिल्ली निवासी मोहम्मद नूर आलम के रूप में हुई है। नूर आलम गैंग का मास्टर माइंड है और वह पाकिस्तान में बैठे सरगना बिलाल के संपर्क में था। आरोपियों ने पीड़ित के खाते से 15.31 लाख की ठगी की थी। पुलिस इनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और धोखाधड़ी की रकम 1.03 लाख खाते में फ्रीज कर दी है।
जिला पुलिस उपायुक्त शशांक जायसवाल ने बताया कि 19 जनवरी को नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए साइबर सेल को ठगी की शिकायत मिली। उसमें एक शख्स ने आरोप लगाया कि 8 जनवरी को उनके पास एक महिला का फोन आया। महिला ने खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से जारी एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल बंगलूरू में गैर-कानूनी गेमिंग गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। उसके बाद पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए बंगलूरू के इंदिरा नगर पुलिस स्टेशन के उप निरीक्षक बनकर बात करने वाले एक व्यक्ति से जोड़ा। उसने पीड़ित को बताया कि उसके आधार पर चार बैंक खाते खोले गए हैं, सभी खाते हितेश मेहता से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े हैं। फिर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बनकर आए व्यक्ति ने उन्हें जांच के दायरे में होने की बात कही।
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संपत्ति का विवरण हासिल किया
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उन्हें लगातार वीडियो निगरानी में रखा गया। कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर आरोपियों ने उन्हें संपत्ति का विवरण बताने के लिए कहा। उसमें उनके बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉज़िट, म्यूचुअल फंड और शेयर शामिल थे। उन्हें बताया गया कि जांच होने तक इसे आरबीआई के खाते में जमा करना होगा और फिर यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मना लिया।
बैंक खातों के जरिए आरोपियों तक पहुंची पुलिस

पुलिस टीम को पता चला कि पीड़ित से कई बैंक खाते में 15.31 लाख रुपये डलवाए गए। जांच में दो खातों की पहचान की गई। उसमें अंकित का यूनियन बैंक खाता जिसमें 1.98 लाख रुपये और अमन कुमार का बैंक ऑफ इंडिया खाता जिसमें 98 हजार जमा हुए थे। जांच में पता चला कि दोनों खातों से जुड़े मोबाइल नंबर एक ही डिवाइस से चल रहे हैं। उनका लोकेशन इस्माइलपुर फरीदाबाद में आ रही थी। उसके बाद पुलिस ने फोन को सर्विलांस पर लगाकर यूपी के कन्नौज जिले के गांव दिपारी में छापा मारकर अंकित को गिरफ्तार किया। उसने बताया कि वह मोहम्मद नूर आलम के लिए काम करता है, जो धोखाधड़ी के लिए म्यूल बैंक खाते इकट्ठा करता और सप्लाई करता है। अंकित ने चार बैंक खाते उपलब्ध करवाने की बात कही। पुलिस ने धोखाधड़ी में बैंक खाता उपलब्ध कराने और स्नैपचैट के जरिए हैंडलर्स के संपर्क में रहने वाले सैम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। इनके जरिए पुलिस ने मास्टर माइंड मोहम्मद नूर आलम को इस्माइलपुर फरीदाबाद से गिरफ्तार कर लिया।
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पाकिस्तान से चल रहा था धोखाधड़ी
आरोपी नूर आलम से पता चला कि वह म्यूल खाता उपलब्ध कराने का काम करता था और पाकिस्तान में रहने वाले बिलाल के संपर्क में था। उसने बताया कि धोखाधड़ी का पैसा बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। उसके बाद वह धोखाधड़ी के पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदल कर बिलाल को ट्रांसफर कर देता था। उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में कमीशन मिलता था, जिसे वह अलग-अलग बैंक खाते के जरिए निकाल लेते थे। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए धोखाधड़ी करने वालों के संपर्क में आए थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन को जब्त कर पैसे की लेन-देन और अन्य साथियों के बारे में जानकारी हासिल कर रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया अंकित दसवीं, सैफ अंसारी 12वीं और नूर आलम स्नातक तक की पढ़ाई कर चुका है।
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