नोएडा के सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल से शुक्रवार पहले कैलाश अस्पताल और वहां के बाद दिल्ली रेफर हुई नवजात को एंबुलेंस के लिए डॉक्टर टरकाते रहे।
चाइल्ड लाइन की सहयोगी संस्था के मुताबिक डॉक्टर के बाद सीएमएस ने भी एंबुलेंस देने से मना कर दिया। सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद सरकारी एंबुलेंस मिली।
चाइल्ड लाइन की सहयोगी संस्था एफएक्सबी इंडिया सुरक्षा के कार्यक्रम अधिकारी सत्यप्रकाश ने बताया कि मीडिया के माध्यम से नवजात बच्ची के बारे में जानकारी मिली थी।
जिला अस्पताल में एनआईसीयू की सुविधा न होने के कारण बच्ची को सेक्टर-27 के कैलाश अस्पताल ले जाना था, जिसके लिए डॉक्टर ने यह कहते हुए मना कर दिया कि प्राइवेट अस्पताल ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस नहीं मिलेगी। सीएमएस डॉ. आरएनपी मिश्र ने भी गाड़ी देने से मना कर दिया।
बच्ची को अस्पताल ले जाने में जितनी देर हो रही थी, उतना ही उसकी जान पर खतरा बढ़ रहा था। फोन पर मामले की जानकारी सीएमओ डॉ. आरके गर्ग को दी गई, जिसके बाद उनके आदेश पर एंबुलेंस मिली।
बच्ची को दिल्ली के वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्ची की हालत स्थिर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल से बच्ची की मां के संबंध में मिली जानकारी के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी सोमवार को पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखेगी।
बता दें कि शुक्रवार सुबह नवजात बच्ची सेक्टर-37 की झाड़ियों में मिली थी। बच्ची ठंड के कारण हाइपोथर्मिया से पीड़ित हो गई थी।