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बकाया न दिया तो कटेगा माननीयों का कनेक्शन

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हाईकोर्ट ने बिजली, पानी, टेलीफोन व होटलों के बिलों का भुगतान न करने वाले सांसदों, विधायकों व राजनीतिक पार्टियों पर लगाम लगाने के लिए कड़े दिशानिर्देश तय किए हैं।
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अदालत ने सरकारी आवास में रहने वाले किसी भी जनप्रतिनिधि या नेता पर तीन माह से ज्यादा बकाया न रखने व तय अवधि में भुगतान न करने पर कनेक्शन काटने का निर्देश दिया है।

साथ ही बकाया वसूली के लिए लोकसभा, राज्यसभा व विधानसभा से संपर्क कर उनके वेतन से वसूली सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं चुनाव आयोग को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि बकाया राशि वाला नेता नामांकन न कर सके।
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इन माननीयों पर है करोड़ों बकाया

मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सांसदों, विधायकों व राजनीतिक पार्टियों पर संबंधित एजेंसियों के करोड़ों रुपये बकाया हैं।

इस संबंध में दायर याचिका 18 वर्ष से लंबित है लेकिन अभी तक इनसे बकाया राशि की वसूली नहीं हो सकी। सभी अपने पद व पावर का दुरुपयोग कर रहे हैं। सरकारी एजेसियों में इतनी इच्छा शक्ति नहीं है कि वे उनसे बकाया राशि वसूल सकें।

अदालत ने कहा कि यह गंभीर मामला है। वे महसूस करते हैं कि बकाया राशि वसूलने के साथ यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस प्रकार किसी पर बकाया राशि न हो और इसके लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

अदालत ने एनडीएमसी, एमटीएनएल, बीएसएनएल व अन्य सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी सांसद, विधायक, राजनीतिक पार्टी पर उनके द्वारा प्रदान सेवा का तीन माह से ज्यादा बकाया न रहे।

नहीं चुकाया तो होगी कड़ी कार्रवाई

यदि तीन माह तक भुगतान नहीं होता तो वे सेवा को तुरंत बंद कर दें और बकाया राशि की कानूनी वसूली शुरू करें। इसी प्रकार आवास आवंटन विभाग भी तय करे कि बकाया राशि वाले का आवंटन ऐसी हालत में रद्द कर दिया जाए।

बकाया राशि के भुगतान तक उक्त पार्टी के किसी भी सदस्य को आवास आवंटन न हो। राजनीतिक पार्टियों पर बकाया राशि एक माह से ज्यादा न हो।

आईटीडीसी को अदालत ने निर्देश दिया कि वह इन सदस्यों को होटल में कमरा उधर न दें बल्कि आम उपभोक्ता को जिस शर्त पर कमरा दिया जाता है उसी के तहत इन सदस्यों को दिया जाए।
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18 साल पुरानी याचिका पर दिया फैसला

अदालत ने चुनाव आयोग को भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि चुनावों के दौरान नामांकन करने वाले व्यक्ति से पिछले 10 वर्ष का किसी भी सरकारी फंड का बकाया न होने का एनओसी लें। यदि ऐसा न हो तो नामांकन रद्द कर दिया जाए।

अदालत के समक्ष यह याचिका एनजीओ कृषक भारत ने वर्ष 1998 में दायर की थी। अदालत ने सांसदों से बकाया लाखों रुपये के बिलों को वसूलने में असफल रहने पर सभी निकायों को समय-समय पर कड़ी फटकार लगाई थी बावजूद इसके अभी तक करोड़ों रुपये बकाया हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सांसद व राजनीतिज्ञों पर टेलीफोन, आवास किराया, बिजली बिल व सरकारी होटलों का लाखों रुपये बकाया है।
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