फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन स्वदेशी हथियारों से हमारे जवान बॉर्डर पर आतंकियों को जटा रहे धूल

Mon, 13 Feb 2017 12:08 AM IST
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
surajkund fair - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
31वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में इन हथियारों का प्रदर्शन किया जा रहा है। बीएसएफ के जवान दर्शकों को हथियारों के बारे में विस्तृत जानकारी भी दे रहे हैं। बीएसएफ जवानों के मुताबिक जम्मू एंड कश्मीर में स्मॉल आम्र्स फैक्टरी कानपुर की बनी 7.62 एमएम, मीडियम मशीनगन (एमएमजी) आतंकियों को नेस्तनाबूत करने का प्रमुख हथियार है। बगैर इसके बॉर्डर पर आतंकियों से लोहा लेना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
विज्ञापन


‘अमर उजाला’ से बातचीत करते हुए मेले में आए बीएसएफ के इंस्टेक्टर राजेश कुमार और हवलदार जय सिंह ने बताया कि एमएमजी हथियार का प्रयोग सेना और बीएसएफ सबसे अधिक करती है। क्योंकि दोनों सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती बॉर्डर पर होती है।

खासकर जम्मू एंड कश्मीर में आतंकियों से निपटने और छत्तीसगढ़, उड़ीसा, मणिपुर, नागालैंड व अन्य उग्रवाद प्रभावित इलाकों में इस हथियार का प्रयोग किया जा रहा है। 
विज्ञापन

इस हथियार को चलाने में तीन जवानों की जरूरत पड़ती है

surajkund fair - फोटो : अमर उजाला
इस हथियार को चलाने में तीन जवानों की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि करीब तीन किलोमीटर दूर तक बैठे आतंकियों को एमएमजी के बल पर ढेर किया जा सकता है। ये हथियार सेना और बीएसएफ का रक्षा कवच भी माना जाता है।

सूरजकुंड मेले में आने वाले दर्शकों को इंसास, एसएलआर, रूस में निर्मित एके-47, इजराइल निर्मित एक्स-95 और इटली निर्मित बराटा हथियार के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। एके-47, बराटा और एक्स-95 नाइट विजन सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए छोटा व घातक हथियार माना जाता है। 
विज्ञापन

एमएमजी की ये है खासियत:

surajkund fair - फोटो : अमर उजाला
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई मीडियम मशीनगन का कुल वजन 11 किलोग्राम होता है। इसे बाइपॉड ग्रुप पर रखकर तीन तरफ फायर किया जा सकता है। इस हथियार से एक मिनट में 600 से 1000 गोलियां दागी जा सकती है।

इसकी मारक क्षमता 1800 मीटर तक है। इसके एक मैगजीन में 30 गोलियां आती हैं जबकि पट्टी वाली राउंड में 235 गोलियां फायर की जा सकती है। बीएसएफ जवानों ने बताया कि स्वदेशी तकनीक पर निर्मित इंसास भी काफी कारगर हथियार माना जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें