आरक्षण की मांग को लेकर डीग गांव में जाटों का धरना 15वें दिन भी जारी रहा। शनिवार को सरकार के साथ पानीपत में हुई वार्ता से जाट नेता बंट गए हैं। कुछ जाट नेता सरकार के इस रुख को सकारात्मक कह रहे हैं तो कुछ वार्ता के बेनतीजा रहने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
धरना स्थल पर जाट समाज के लोगों ने नारेबाजी कर अपने गुस्से का इजहार किया। जाट समाज के वक्ताओं ने धरना स्थल पर कहा कि सरकार हर तरह से विफल रही है। वक्ताओं ने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में जाट समाज ही दुखी नहीं है, बल्कि सभी वर्गों के लोग परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार जाटों को आरक्षण देना चाहती है तो कल की वार्ता सिरे चढ़ जाती, लेकिन सरकार जाटों की आरक्षण संबंधी मांगों को स्वीकृत नहीं करके उनके हितों पर कुठाराघात कर रही है।
वार्ता में 22 जिलों के जिलाध्यक्ष पहुंचे थे
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- फोटो : अमर उजाला
वहीं, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष अमीचंद ने वार्ता को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि वार्ता में 22 जिलों के जिलाध्यक्ष पहुंचे थे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित टीम ने सभी अध्यक्षों को वार्ता से पूर्व धरना संबंधित परेशानियों की जानकारी ली और समस्या सुनकर उसके निदान का आश्वासन दिया।
वार्ता में प्रशासनिक अधिकारियों ने जाट नेताओं की बात ध्यान से सुनी और उन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का ठोस आश्वासन दिया। जाट नेताओं का दावा है कि जब तक उनकी सभी मांगों को नहीं माना जाता है।
वह आंदोलन स्थगित नहीं करेंगे। धरने में हरिप्रसाद अत्री, विक्रम सिंह जवां, मुनेश चौधरी, विजय चौहान, सुरेंद्र, वीरेंद्र फौजी, मास्टर रतिराम, समय मोहना, रामवीर अटाली, हन्नी पाहिल, परमजीत तेवतिया, आदर्श बाल्यान, सतवीर तेवतिया, रामफूल, किशन सिंह चहल और गांव दयालपुर की सरदारी मौजूद थीं।
वहीं प्रशासन द्वारा रविवार को भी धरने पर निगाह रखी गई। सीआईडी के लोग आंदोलन से जुड़ी प्रत्येक दो घंटे की रिपोर्ट वाट्सऐप और मेल के माध्यम से दे रहे थे।