राजधानी में आवारा कुत्तों की समस्या से सिर्फ नागरिक नहीं सरकार भी परेशान है। दिल्ली नगर निगम रेगुलर नसबंदी का दावा करती है लेकिन संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है।
हालत यह है कि राष्ट्रपति शासनकाल में मामला अब सीधे उपराज्यपाल नजीब जंग के दरबार में पहुंच चुका है।
उपराज्यपाल ने अस्पतालों के आसपास से कुत्ते तुरंत हटाने के निर्देश देने के अलावा कुत्तों की गिनती का आसान तरीका निकालने के निर्देश भी दिए हैं।
एलजी के सख्त निर्देश
उपराज्यपाल नजीब जंग के दरबार में गत दिनों जब आवारा कुत्तों से दिक्कत का मामला प्रधान वित्त सचिव डॉ. एमएम कुट्टी ने उठाया तो स्वास्थ्य सचिव डॉ. एससीएल दास ने उसका समर्थन किया।
प्रधान वित्त सचिव ने कहा कि जीटीबी और एलएनजेपी अस्पताल का दौरा करने के दौरान कुत्तों की जो दिक्कत सामने आई थी, अभी तक उसका समाधान नहीं हुआ है।
इस पर स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि हालात बिगड़ रहे हैं। महज तीन अस्पताल में औसतन दैनिक 1350 रैबीज के टीकों की खपत हो रही है। इस पर उपराज्यपाल ने निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों के आसपास कुत्ते घूमते हुए न दिखाई दें। उत्तरी व पूर्वी एमसीडी इसे सुनिश्चित करे।
कुत्तों की नसबंदी में लग जाएंगे 3 साल
अकेले दक्षिण दिल्ली नगर निगम में एक लाख आवारा कुत्तों संख्या निगम आयुक्त ने बताई है। जबकि पूर्वी एमसीडी और उत्तरी एमसीडी में गिनती का पता नहीं है।
दक्षिण दिल्ली निगमायुक्त ने बताया है कि एक लाख आवारा कुत्तों में से 50 हजार की नसबंदी कर चुके हैं। बाकी पचास हजार में से 90 फीसदी की नसबंदी करने के लिए संसाधन कुत्ते पकड़ने वाली वैन, एनजीओ बढ़ा भी लें तो तीन साल लगेंगे।
प्रजनन चक्र के कारण फिर संख्या बढ़ जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए जाने की जरूरत है।
नसबंदी में खर्च होती है मोटी रकम
बता दें कि सालों को कुत्तों की नसबंदी के नाम पर मोटी रकम एमसीडी खर्च करती है लेकिन पॉश कॉलोनियों को छोड़ दें तो ज्यादातर शहर में आवारा कुत्तों ने आतंक फैलाया हुआ है।
सिर्फ सरकार अस्पताल में दैनिक 1350 टीकों की खपत केअलावा प्राइवेट अस्पताल में भी कुत्तों के काटने पर इंजेक्शन लगाने वालों की बड़ी संख्या पहुंचती है।
उपराज्यपाल की बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने कहा था कि राजधानी में कुत्तों की समस्या बहुत गंभीर हो गई है। रैबीज मामलों के देखने वाले तीन अस्पताल हैं और प्रत्येक अस्पताल में रोजाना 450 रैबीज के टीके की खपत हो रही है।