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37 अरब की ठगी मामला : ये हैं 12 सरकारी विभाग, जिन्होंने एबलेज पर शिकायत की नजरअंदाज

Wed, 15 Feb 2017 10:21 AM IST
अमित सिंह/अमर उजाला, नोएडा
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file photo - फोटो : अमर उजाला
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अनुभव मित्तल की एबलेज कंपनी के वेब पोर्टल सोशल ट्रेड डॉट बिज के खिलाफ 12 से ज्यादा सरकारी विभागों को शिकायत मिल रही थीं। धोखाधड़ी का शिकार हो रहे लोग पांच-छह माह से कंपनी के खिलाफ शिकायत कर रहे थे।
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कुछ विभागों ने जांच शुरू भी की, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। एसटीएफ ने अब इन सरकारी विभागों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। अक्तूबर-नवंबर 2016 में आरबीआई के वेब पोर्टल सचेत पर तीन लोगों द्वारा सोशल ट्रेड के खिलाफ विस्तृत शिकायत की गई थी। इसमें कंपनी का बिजनेस मॉडल भी बताया गया था। 

आरबीआई ने इन शिकायतों को मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के रजिस्ट्रार ऑफ सर्टिफिकेशन (आरओसी) को जांच के लिए शिकायत भेज दी। आरओसी ने अक्तूबर-2016 में एबलेज कंपनी के पंजीकरण में प्रयोग किए गए दो पतों की जांच की। जांच में दोनों पते फर्जी पाए गए, बावजूद शिकायत को बंद कर दिया गया। 
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बैंक खातों में लगभग पौने तीन करोड़ रुपये नकद जमा हुए

anubhav mittal - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के दौरान एबलेज के बैंक खातों में लगभग पौने तीन करोड़ रुपये नकद जमा हुए, लेकिन इस पर न तो बैंकों ने ध्यान दिया और न ही आयकर विभाग की नजर पड़ी।

दो वर्ष में कंपनी का टर्न ओवर और निवेशक तेजी से बढ़े पर घाटा भी बढ़ गया। यही नहीं, एबलेज कंपनी फर्जी कंपनियों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर उसे सफेद कर रही थी। फिर भी आयकर विभाग ने ध्यान नहीं दिया। एबलेज के बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन की रिपोर्ट (एसटीआर) यस बैंक ने 5 जनवरी को वित्त मंत्रालय की फाइनेंस इंटेलिजेंस यूनिट को दी थी।

इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सर्विस टैक्स विभाग की टीम ने अप्रैल-2016 में एबलेज कंपनी में छापा मारकर सर्विस टैक्स की चोरी पकड़ी। इसके लिए कंपनी से लगभग पौने चार करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, लेकिन विभाग ने ये जानने का प्रयास नहीं किया कि कंपनी आखिर काम क्या करती है। इतना ही नहीं एबलेज के खिलाफ जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस को भी शिकायत मिली थी, लेकिन किसी ने गहनता से जांच नहीं की।

इन विभागों ने मूंदी आँखें

anubhav mittal - फोटो : राजन राय
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), रजिस्ट्रार ऑफ सर्टिफिकेशन (आरओसी), प्रवर्तन निदेशालय, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू), आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), सर्विस टैक्स विभाग, आयकर विभाग, बैंक, जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस।

एसटीएफ को कुछ पीड़ितों ने बताया कि पूर्व में स्थानीय पुलिस से भी शिकायत की थी, लेकिन रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई। इन विभागों के अलावा मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन विभाग को भी सोशल ट्रेड की शिकायत मिली थी।

सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन विभाग मामले की जांच कर रहा था। हालांकि, उसके कार्रवाई करने से पूर्व एसटीएफ ने आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का भंडाफोड़ कर दिया।

एफडीएसए ने भी तीन जगह की थी शिकायत

anubhav mittal - फोटो : राजन राय
फेडरेशन ऑफ डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन के किशोर वर्मा ने बताया कि उन्हें 4-5 निवेशकों ने ईमेल कर एबलेज कंपनी द्वारा उनका फर्जी प्रमाण पत्र प्रयोग करने की शिकायत की थी।

इसके बाद उन्होंने कंपनी को तीन नोटिस जारी किए। जब कंपनी ने किसी का भी जवाब नहीं दिया तो एसोसिएशन ने मुंबई की आर्थिक अपराध शाखा, मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स और यूपी पुलिस से शिकायत की थी।

प्रमाण पत्र में कंपनी का पता गाजियाबाद का था। लिहाजा, कविनगर थाने की पुलिस ने कंपनी में जाकर मामले की जांच भी की थी। हालांकि, उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिर कुछ समय पहले ये केस एसटीएफ को ट्रांसफर कर दिया गया था।

अन्य विभागों ने क्यों नहीं की कार्रवाई

anubhav mittal - फोटो : राजन राय
एसटीएफ एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि एबलेज के खिलाफ लगभग उन सभी विभागों को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं, जो वित्तीय मामलों की जांच करती हैं। ये शिकायतें इतनी विस्तार से हैं कि इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था। बावजूद विभागों ने इन्हें नजरअंदाज क्यों किया।

इसके पीछे सरकारी विभागों की मिलीभगत की जांच की जा रही है। जांच में अगर जरूरी हुआ तो संबंधित विभाग के अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। लापरवाही का ही नतीजा है कि महज दस दिन में नोएडा में ही एक और फर्जी कंपनी वेबवर्क सामने आ गई। नोएडा-गाजियाबाद आसपास इस तरह की कंपनियों की भरमार है।
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हैदराबाद में एक और रिपोर्ट दर्ज

anubhav mittal
एसटीएफ के मुताबिक, एबलेज कंपनी के खिलाफ हैदराबाद में एक और एफआईआर दर्ज हो गई है। हैदराबाद के साईबराबाद में पहले से दो एफआईआर दर्ज है। एफडीएसए भी जल्द एबलेज के खिलाफ उनकी एसोसिएशन का फर्जी प्रमाण पत्र प्रयोग करने के लिए एफआईआर दर्ज कराएगी।

18 फरवरी को लखनऊ में पेशी
एबलेज के मालिक अनुभव मित्तल, सीईओ श्रीधर प्रसाद और तकनीकी प्रमुख महेश दयाल की एसटीएफ रिमांड मंगलवार सुबह दस बजे खत्म हो गई। दोनों को वापस जेल भेज दिया गया है। पांच दिन की रिमांड पर एसटीएफ को आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।

इस दौरान आरोपियों को रात के वक्त सूरजपुर थाने की हवालात में रखा जा रहा था। एसटीएफ की रिमांड खत्म होने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इनकी रिमांड का प्रयास तेज कर दिया है। इसके लिए आरोपियों को 18 फरवरी को लखनऊ कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
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