हाउसिंग बोर्ड की बैठक में समाजवादी आवास योजना में गाजियाबाद, लखनऊ, और मेरठ में 10 हजार सस्ते फ्लैट बनाने पर मुहर लगा दी गई।
यह निर्णय बृहस्पतिवार को प्रमुख सचिव आवास सदाकांत की अध्यक्षता में हुई आवास विकास परिषद बोर्ड की बैठक में लिया गया। इसमें गाजियाबाद के मंडोला विहार आवासीय योजना में चार हजार अर्फोडेबल फ्लैट बनाए जाने का निर्णय हुआ।
इनकी कीमत 10 से 30 लाख के बीच होगी। कम कीमत पर फ्लैट देने के लिए बैठक में जमीन की लागत को डेढ़ गुना से घटाकर एक गुना रखना तय किया गया।
मंडोला विहार योजना की लोकप्रियता को देखते हुए आइकोनिक बिल्डिंग के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। यह व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बहुआयामी केंद्र साबित होगा। गाजियाबाद में इन फ्लैटों के पंजीकरण के संबंध में फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है।
अभियंताओं के पदोन्नति की बाधा दूरः अभियंताओं के पदोन्नति में नॉन फील्ड जॉब की अनिवार्यता की आने वाली बाधा को समाप्त कर दिया गया है। नॉन फील्ड जॉब यदि अभियंता दो साल नहीं भी करता है तो भी उसे पदोन्नति दे दी जाएगी।
इसके लिए तर्क दिया गया कि परिषद में नॉन फील्ड जॉब वाले बहुत कम ही पद हैं। इसलिए ऐसे पदों पर तैनाती न हो पाने की वजह से अभियंताओं को पदोन्नति में बाधा आ रही थी।
वहीं, चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को भी समयमान वेतनमान का लाभ देने का निर्णय किया गया है। कर्मचारियों को यह लाभ 1 जनवरी 2006 से दिया जाएगा।
सिद्धार्थ और मंडोला विहार की अन्य योजना को भी लाभ
सिद्धार्थ विहार योजना के सेक्टर 7 में गंगा, यमुना व हिंडन अपार्टमेंट की अवशेष लागत 7485.28 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई।
इसी तरह मंडोला विहार योजना में समाजवादी फ्लैटों से अलग सेक्टर 7 में 1856 फ्लैट बनाने के लिए 56999.47 लाख की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
सिद्धार्थ विहार योजना को 12.5 क्यूसेक जलापूर्ति के लिए नगर निगम की जमीन पर जल निगम की प्रस्तावित परियोजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का निर्णय किया गया है।
मंडोला विहार योजना में जलापूर्ति के लिए ट्यूबवेल लगाने को 975 वर्ग मीटर जमीन मुफ्त देने का निर्णय किया गया।
पांच हजार करोड़ की जमीनों का होगा सेटलमेंट
हाउसिंग बोर्ड की प्रदेश में करीब 5000 करोड़ की जमीनें फंसी हुई हैं। इसके चलते इन जमीनों पर न तो योजनाएं आ पा रही हैं और न ही इसका सेटेलमेंट हो पा रहा है।
इसलिए बोर्ड की बैठक में एक सेटेलमेंट कमेटी बनाने का निर्णय किया गया है। यह कमेटी इन जमीनों का सेटलमेंट करने के लिए लोगों से बातचीत करेगी और इसका समाधान निकालेगी।
अपर आवास आयुक्त व सचिव रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सेटलमेंट कमेटी को तीन माह के अंदर इसका निस्तारण करना होगा जिससे सालों से फंसे मामले का निस्तारण हो सके।