नई दिल्ली व पश्चिमी दिल्ली के कई इलाकों में शनिवार को जल संकट रहा। लोगों ने टैंकर मंगाकर प्यास बुझाई और कठिनाई से रोजमर्रा के कामकाज किए। लोग टकटकी लगाए टैंकर की राह देखते रहे। वहीं, जब टैंकर आए तो पानी भरने के लिए जूझना पड़ा। घंटों की मशक्कत के बाद महिलाएं पानी घर ले जा सकीं।
जल बोर्ड की ओर से दिन में जानकारी दी गई कि मुनक नहर के टूटे तटबंध की मरम्मत कर पानी की आपूर्ति शुरू की गई है। इसके बाद माना जा रहा कि जिन इलाकों में अभी पानी की किल्लत है, रविवार तक आपूर्ति निर्बाध तरीके से चालू हो जाएगी। शनिवार को नई दिल्ली के वीआईपी इलाके राष्ट्रपति भवन, सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट, दूतावास, केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण भवन आदि में भी पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई। इनके साथ पश्चिमी दिल्ली के कई हिस्से, करोल बाग, पहाड़गंज व एनडीएमसी के हिस्से, ओल्ड व न्यू राजेंद्र नगर, पटेल नगर, बलजीत नगर, प्रेम नगर, इंद्रपुरी इत्यादि में पानी के लिए लोगों को तरसना पड़ा। दिल्ली कैंट और दक्षिणी दिल्ली के इलाके भी प्रभावित रहे।
दिल्ली को 750 क्यूसेक कच्चा पानी हरियाणा के रास्ते मुनक नहर से मिलता है। करीब तीन दिन पहले सोनीपत जिले में बडवासनी गांव के पास नहर का करीब 50 मीटर तटबंध अचानक टूट गया था। इसके बाद जल बोर्ड, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के सहयोग से नहर के तटबंध को बांधने का काम किया और पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू कराई, लेकिन करीब 50 घंटे पानी की आपूर्ति बाधित होने से दिल्ली में पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर इसका असर पड़ा। नहर का पानी हैदरपुर-1, हैदरपुर-2, बवाना, नांगलोई और द्वारका वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में जाता है। वहां से दिल्ली के करीब 30 लाख लोगों तक पहुंचता है।
पानी बिल पर लोगों को धोखा दे रहे केजरीवाल : भाजपा
पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर पानी के बिलों को लेकर धोखा देने का आरोप लगाया है। गोयल ने कहा कि जल बोर्ड में भारी भ्रष्टाचार है। इसी भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए बिलों पर एकमुश्त निपटान योजना लाने की घोषणा की गई है, जबकि सच्चाई यह है कि इस योजना का अभी प्रारूप तक तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री ने बिना सोचे-समझे इसकी घोषणा की है। पानी का बिल लाखों रुपये में आने से सरकार एकमुश्त निपटान योजना की बयानबाजी कर रही है।
मीडिया को एक वीडियो दिखाते हुए गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री 2016 से कहते आ रहे हैं कि 27.6 लाख उपभोक्ताओं के बिलों में भारी हेराफेरी है। एक फ्यूचर सॉफ्टवेयर बनाने का भी वादा दिल्ली वालों से किया गया था। इसमें मोबाइल से मीटर रीडिंग करके उपभोक्ता खुद बिल बनाएगा, ताकि गलत मीटर रीडिंग न हो। यह योजना भी हवा हवाई साबित हुई। गोयल ने दिल्ली सरकार से नौ सवाल पूछे हैं जिसमें कहा गया है कि जिन उपभोक्ताओं ने बिल जमा करा दिए हैं, उनका भुगतान वापस कैसे होगा। मीटर रीडर्स पर क्या कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने किस आधार पर यह घोषणा की है। वर्ष 2016 में घोषित फ्यूचर सॉफ्टवेयर कहां गया।