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ऐसा अस्पताल जहां महिला डॉक्टरों के लिए ही नहीं शौचालय

Sat, 03 Oct 2015 07:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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सरकार स्वच्छ भारत पर जोर दे रही है। हर घर शौचालय का नारा बुलंद किया जा रहा है लेकिन देश की राजधानी से सटे फरीदाबाद के सरकारी अस्पताल की हालत चौंका देने वाली है।
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जिले के इस सबसे बड़े सिविल अस्पताल में मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए शौचालय तक नहीं हैं। डॉक्टर और नर्स से लेकर अन्य स्टाफ को शौचालय न होने से रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, मरीज और तीमारदारों के लिए जो शौचालय तो बनाए गए हैं लेकिन उनकी हालत भी ठीक नहीं है। 200 बेड वाले सिविल अस्पताल में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए करीब 125 लोगों का स्टाफ तैनात है।
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इनमें 13 लेडी डॉक्टर सहित 32 डॉक्टर हैं। 23 नर्स के अलावा करीब 50 महिला-पुरुषों का पैरामेडिकल स्टाफ है। बाकी कर्मचारी अन्य कार्यो में लगे हैं।

अस्पताल में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक, दोपहर दो बजे से रात आठ बजे तक और रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है।

स्टाफ की कमी के चलते डॉक्टर और नर्सों को छह या बारह घंटे की शिफ्ट से भी ज्यादा समय तक काम करना पड़ता है। ओपीडी में डॉक्टरों के चेंबर बनाए गए हैं इसी तरह सभी वार्डों में भी डॉक्टर के लिए चेंबर हैं लेकिन इनमें से किसी में भी शौचालय की सुविधा नहीं है।

तीसरे तल पर प्रशासनिक ब्लॉक में एक शौचालय बनाया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल पीएमओ और उनके कार्यालय में काम करने वाला स्टाफ ही करता है।

भूतल, प्रथम और द्वितीय तल पर न तो डॉक्टरों के लिए और न ही नर्सों के लिए शौचालय की सुविधा है। नाम न छापने के अनुरोध पर एक महिला डॉक्टर ने बताया कि शौचालय न होने की वजह से लगातार छह से आठ घंटा काम करना मुश्किल होता है।

यही हाल नर्सों का है। इन लोगों का कहना है कि संक्रमण से बचाव के मद्देनजर मरीजों के लिए बनाया गया शौचालय इस्तेमाल नहीं किया जाता है। शौचालय के बिना खासकर महिला स्टाफ को दिक्कत और शर्र्मिदगी उठानी पड़ती है।

अस्पताल में मरीज और उनके तीमारदारों के लिए शौचालय बनाए गए हैं लेकिन इनमें न तो सफाई रहती है और न ही सुरक्षा। द्वितीय तल स्थित सर्जरी वार्ड के शौचालयों में दरवाजे टूटे हुए हैं। यूरिनल भी गंदा पड़ा रहता है। प्रथम तल पर जच्चा बच्चा वार्ड के शौचालय का भी हाल बुरा है।

अस्पताल में मरीजों की सुविधा और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाता है। इमारत में शौचालय हैं इनका इस्तेमाल मरीज और उनके तीमारदार करते हैं। -डॉ. सुरेश चंद्र, पीएमओ सिविल अस्पताल फरीदाबाद
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