अस्पताल के डॉक्टरों को डेंटल मरीजों की देखभाल के दौरान सामान्य किट पहनने के लिए दी जा रही है। इसमें गाउन, हेड कैप, शील्ड और फेसमास्क होता है। लेकिन पीपीई किट्स की तरह यह चारों तरफ से कवर नहीं होता, जिसके कारण इसे पहनने के बाद भी संक्रमण की गुंजाइश बनी रहती है।
अस्पताल में इन दिनों दंत चिकित्सा के लिए आने वाले हर मरीज की कोरोना संक्रमण के लिहाज से प्राथमिक जांच की जाती है। हर मरीज के शरीर के तापमान का स्तर चेक किया जाता है। इसके अलावा उनमें सर्दी-खांसी होने की संभावना का भी पता किया जाता है।
लेकिन किसी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण पता करने के लिए यह बहुत विश्वसनीय तरीका नहीं माना जाता है, क्योंकि भारत में कोरोना के 69 फीसदी तक मरीज बिना किसी लक्षणों वाले पाए गए हैं। ऐसे में किसी मरीज के बाहरी स्रोत से संक्रमित होने की स्थिति में डॉक्टरों के भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ गई है।