उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरल) परियोजना और चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज ने घाटी की आर्थिकी को रफ्तार दे दी है। रेलवे ने इन दो परियोजनाओं की मदद से कश्मीर घाटी से दो माह में 62,844 टन सामान का परिवहन किया है। उत्तर रेलवे ने कश्मीर घाटी तक पहली बार ऑटोमोबाइल रैक के जरिये 116 कारें अनंतनाग पहुंचाई हैं।
रेलवे के अनुसार, इस ट्रैक पर पहली मालगाड़ी इस साल 8 अगस्त को चली। तब से लेकर 30 सितंबर 2025 तक सेब से लेकर सीमेंट तक का परिवहन किया गया है। सेब जैसे कृषि उत्पादों का परिवहन स्थानीय किसानों के लिए वरदान साबित हुआ है, क्योंकि इससे उनकी उपज देश के अन्य हिस्सों में तेजी से और कम लागत में पहुंच रही है। सीमेंट और इस्पात जैसे औद्योगिक सामानों की ढुलाई ने क्षेत्र में निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास को गति दी है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि घाटी में रेल नेटवर्क के विस्तार और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाओं ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि "हमारा लक्ष्य न केवल परिवहन को सुगम बनाना है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है।
चार महीने पहले शुरू हुई थी परियोजना
भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जून 2025 को किया था। 272 किलोमीटर लंबी परियोजना कश्मीर घाटी को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ती है। अब यह परियोजना जम्मू-कश्मीर की आर्थिक, सामरिक और सामाजिक प्रगति का नया द्वार भी खोल रही है। रेलवे कश्मीर घाटी में नई लाइनों का विस्तार भी कर रही है। वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने व माल ढुलाई क्षमता दोगुनी करने पर काम किया जा रहा है।
परिवहन क्षमता बढ़ाने की संभावना
रेलवे इस रूट पर अधिक मालगाड़ियों का संचालन और रेल नेटवर्क का विस्तार कर सकता है। इस कदम से घाटी के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले सड़क मार्ग से परिवहन में समय और लागत अधिक लगती थी, लेकिन अब रेलवे ने कश्मीर घाटी की उपज को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में मदद की है।