अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
एमसीडी में महापौर और उपमहापौर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब नए नेतृत्व के चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, इन चुनावों में देरी के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और असम में चल रहे विधानसभा चुनावों के चलते एमसीडी में सत्तारूढ़ भाजपा इन पदों के लिए चुनाव 20 अप्रैल के बाद कराने की योजना बना रही है। बताया जा रहा कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पार्षद इन राज्यों के चुनावी अभियान में व्यस्त हैं, जिसके कारण निगम के भीतर राजनीतिक गतिविधियां फिलहाल धीमी पड़ गई है। इसी का असर बुधवार को एमसीडी मुख्यालय में भी साफ नजर आया, जहां पार्षदों की मौजूदगी और गतिविधियां सामान्य से काफी कम रहीं।
महापौर राजा इकबाल सिंह, उपमहापौर जयभगवान यादव और नेता सदन प्रवेश वाही भी अपने-अपने कार्यालयों में नहीं पहुंचे। महापौर और उपमहापौर का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी एक तरह की अंतरिम स्थिति बन गई है, जिससे निगम के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एमसीडी में मौजूदा समीकरणों को देखते हुए भाजपा का इन दोनों पदों पर दोबारा कब्जा लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि निगम सदन में उसके पास स्पष्ट बहुमत है। हालांकि इस बार आम आदमी पार्टी भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वह महापौर और उपमहापौर दोनों पदों के लिए अपने उम्मीदवार उतार सकती है, जिससे चुनावी मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष आम आदमी पार्टी ने सत्ता में होने के बावजूद इन पदों के लिए चुनाव नहीं लड़ा था, जिससे भाजपा को बिना मुकाबले इन पदों पर कब्जा करने का मौका मिला था। लेकिन इस बार पार्टी रणनीति बदलते हुए सक्रिय भागीदारी की तैयारी में है, जो निगम की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है। वहीं, चुनाव में देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या निगम के महत्वपूर्ण पदों को लंबे समय तक खाली रखना प्रशासनिक दृष्टि से उचित है। अब नजर इस बात पर है कि चुनाव की आधिकारिक तारीख कब घोषित होती है और क्या आम आदमी पार्टी वास्तव में मैदान में उतरकर मुकाबले को द्विपक्षीय रूप देती है।