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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदलेगा शहर में वाहनों का गणित

Wed, 16 Dec 2015 07:25 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते हुए प्रदूषण से चिंतित सर्वोच्च न्यायालय ने 2005 से पहले के डीजल वाहनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। आने वाले समय में इसका असर औद्योगिक नगर फरीदाबाद में भी दिखाई देगा।
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हालांकि आरटीए अधिकारी शहर में 2005 से पहले के डीजल वाहनों के नहीं चलने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यहां अब भी करीब आठ हजार ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं। इनमें से करीब 6000 तो पुराने ऑटो ही हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में फरीदाबाद की आबोहवा सबसे ज्यादा प्रदूषित है। यहां सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) 2.5 की मात्रा मानक से करीब आठ गुना ज्यादा (327 माइक्रोग्राम/घनमीटर) दर्ज की गई है।
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 आरटीए और एसडीएम कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक शहर में 85000 कमर्शियल वाहन रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 62000 तो सिर्फ ट्रक समेत भारी वाहन हैं। बाकी 23000 में अधिकतर सीएनजी और पेट्रोल वाहन हैं।

इनमें से करीब 6000 ऑटो और 2000 अन्य वाहन डीजल वाले हैं। वहीं नॉन कमर्शियल वाहनों की संख्या कुल 1.01 लाख है। इनमें से फरीदाबाद में 67,000 और बल्लभगढ़ में 34,000 हैं।

इनमें करीब 45000 वाहन डीजल से चलने वाले हैं, बाकी पेट्रोल और सीएनजी ईंधन पर आधारित हैं। आरटीए सचिव जयदीप कहते हैं कि शहर में 2005 से पहले का कोई भी डीजल वाहन दिसंबर 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित किए जाने से चलने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन और रीरजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद है।

वहीं फरीदाबाद ऑटो एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष वासदेव अहेरिया बताते हैं कि शहर में डीजल वाहन तो बहुत ही कम चल रहे हैं। 2005 से पहले के ऑटो शहर के बाहर ग्रामीण इलाकों में ही चल रहे हैं, इनकी संख्या करीब छह हजार हैं।

क्राउन इंटीरियर मॉल के पास स्थित ऑटो मेकेनिक धर्मवीर ने बताया कि शहर में 2005 से पुराने निजी डीजल वाहन न के बराबर हैं। डीजल इंजन को सीएनजी में कन्वर्ट नहीं किया जा सकता।
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