संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
भाग-दौड़ के बीच युवाओं में तनाव एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रहा है। पढ़ाई का दबाव, करियर की अनिश्चितता, प्रतियोगी माहौल, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग और पारिवारिक अपेक्षाएं ये सभी कारण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि लगातार बना रहने वाला तनाव युवाओं की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक ग्रोथ में बड़ी रुकावट बन रहा है।
तनाव बन रहा बाधक
डॉक्टर के अनुसार लंबे समय तक तनाव बने रहने से युवाओं में नींद की कमी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, आत्मविश्वास की कमी और निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा सिरदर्द, पेट से जुड़ी समस्याएं, ब्लडप्रेशर और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मानसिक रूप से तनावग्रस्त युवा पढ़ाई और काम में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका व्यक्तिगत और पेशेवर विकास प्रभावित होता है।
मनोचिकित्सक की सलाह तनाव से कैसे बचें
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के मेडिकल डिप्टी सुपरिंटेंडेंट एवं वरिष्ठ प्रोफेसर मनोचिकित्सा डॉ ओम प्रकाश ने बताया कि सबसे पहले तनाव को समझना जरूरी है युवाओं में बढ़ता तनाव कमजोरी नहीं है। यह पढ़ाई, करियर, प्रतिस्पर्धा, बेरोजगारी, पारिवारिक अपेक्षाएं और सोशल मीडिया के दबाव का स्वाभाविक परिणाम है। जब अपेक्षाएं क्षमता से ज्यादा हो जाती हैं, तब तनाव पैदा होता है। तनाव को छुपाने या नजरअंदाज करने से समस्या बढ़ती है। सब ठीक है कहकर तनाव को दबाने से तनाव बढ़ता है। पर्याप्त नींद की कमी से तनाव की स्थिति बढ़ती है। रोजाना 30-40 मिनट व्यायाम तनाव हार्मोन को कम करता है और दिमाग में सकारात्मक रसायनों को बढ़ाता है। तनाव से बचने के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी जरूरी है। युवाओं को अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। हर समय सफल होना जरूरी नहीं इस सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता है। लंबे समय तक तनाव बने रहने की स्थिति में मनोचिकित्सक से सलाह लेना जरूरी।