बदमाशों के हाथों मारे गए कैब चालक आफताब आलम के बेटे मोहम्मद साबिर का कहना है कि उनके पिता की जान अलग मजहब का होने की वजह से गई। लूटपाट ही मकसद होता तो बदमाश कार को क्यों छोड़ जाते? बदमाशों ने उनके पिता के पर्स तक को हाथ नहीं लगाया।
दुखी साबिर कहते हैं, मेरे पिता को जय श्रीराम बोलने में भी कोई दिक्कत नहीं थी। उन्होंने कहा, पिता हर मजहब का सम्मान करते थे। उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को भी यही सीख दी थी। उन्हीं की सीख से मैं और मेरा परिवार एक बार नहीं हजार बार जय श्रीराम बोल सकते हैं। पिता बुलंदशहर जिस युवती को छोड़ने गए थे। वह हिंदू धर्म से ताल्लुक रखती है। इसके बावजूद उसके परिजन आफताब को परिवार का सदस्य समझकर पूरा भरोसा करते हैं। सात साल से युवती के परिजन बेटी को लाने-ले जाने के लिए आफताब को ही कॉल करते थे।
पर्स कैब में ही रखा मिला, लूटते तो साथ ले जाते बदमाश
साबिर ने बताया कि बदमाशों ने वारदात लूट के इरादे की होती तो वह उनके पिता की कैब लूटकर ले जाते। उनके पिता का पर्स भी कैब में रखा मिला था। इसे पुलिस ने उन्हें छूने नहीं दिया। पुलिस ने उनसे पूछा कि इसमें कितने रुपये होने चाहिए, तो उन्होंने अंदाजे से 3500 रुपये बताये थे। रुपये लूटे गए या नहीं, इसकी उन्हें ठीक से जानकारी नहीं है लेकिन एफआईआर में पुलिस ने इतने रुपये लिखवा दिए। हालांकि उनके पिता का मोबाइल गायब है लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उनके पिता की हत्या लूटपाट के इरादे से की गई है।
रिकार्डिंग में मुस्लिमों को नौकरी दिलाने व शराब पीने का जिक्र
साबिर ने बताया कि 41 मिनट से अधिक की रिकार्डिंग में आरोपी उनके पिता से शराब की पेशकश कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके कई मुस्लिम साथी शराब पीते हैं। उसने यह भी कहा है कि उसके भाई दुबई में कई मुस्लिमों को नौकरी पर लगाते हैं।
चना विक्रेता से जय श्री राम कहलवाने का पुलिस का दावा, परिजन ने नकारा
पुलिस का दावा है कि वॉइस रिकार्डिंग में कैद जय श्रीराम का नारा लगवाने का वार्तालाप कैब चालक से नहीं होकर चने विक्रेता से हुआ है। पुलिस चने विक्रेता को भी तलाश रही है। वहीं, परिजन अपने बयान पर अडिग हैं। उनका कहना है कि यह बातचीत आरोपियों और आफताब के बीच की है।