इंडिया गेट गार्डन में शुरू हुए सरस आजीविका मेले में हैंडलूम उत्पाद लोगों को खूब भा रहे हैं। चमड़े पर हाथ से की गई कारीगरी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से इस मेले का आयोजन किया गया है। इसमें विभिन्न राज्यों के लघु उद्योगों से जुड़ी उद्यमी अपने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं।
10 से 23 अक्तूबर तक चलने वाला यह मेला पहले दिन ही लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन गया। उद्यमियों के हाथों से तैयार उत्पाद लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। हरियाणा के मिट्टी के बर्तन, आचार, क्रोशिया के सामान और उत्तर प्रदेश के हैंडलूम उत्पादों को लोग हाथों हाथ ले रहे हैं।
चमड़े के लैंप बने पहली पंसद आंध्र प्रदेश से सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं चमड़े के लैंप लेकर मेले में आई हैं। इन लैंप को चमड़े पर फूल-पत्ती, भगवान की आकृति, ज्यामितीय डिजाइन की ड्राइंग कर तैयार किया गया है। इसके बाद उस पर रंग भरे गए हैं। इन्हें तैयार करने वाली महिलाओं ने बताया कि इस काम में काफी मेहनत लगती है।
एक लैंप बनाने में एक दिन से ज्यादा लग जाता है। हॉल नंबर एक में चमड़े से तैयार सामान लैंप, बंदनवार आदि को देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
बागपत के महिला समूह की भी प्रशंसा
हाथ के सामान की अलग ही पहचान होती है। इसकी बानगी सरस मेले के हॉल नंबर-2 में देखने को मिल रही हैैं। यहां उत्तर प्रदेश के बागपत बड़ागांव खेकड़ा से दिलशाद अली हैंडलूम उत्पाद लेकर पहुंचे हैं।
दिलशाद ने बताया कि उनके यहां हैंडलूम व एप्लिक कार्य की शुरुआत 2016-17 में की गई थी। 12 महिलाओं के एक समूह हाथ से बैडशीट, कुशन कवर, तकिये के कवर, मेट बनवाने शुरू किए। घर से शुरुआत करने वाला यह समूह आज बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। यह समूह अन्य राज्यों में होने वाले सरस मेलों मेें भी अपने उत्पाद लेकर जाता है।
इस कार्य का पूरा श्रेय उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित मुकद्दस स्वयं सहायता समूह को दिया। मेले में आने वाले लोग इनकी कारीगरी को सराहना करते हुए खूब खरीदारी कर रहे हैं।