राजधानी में लोगों के बीच किस पार्टी का जलवा बरकरार है या किससे लोगों ने दूरी बनानी शुरू कर दी है। इन सब सवालों का जवाब मंगलवार को तीनों नगर निगम के 13 वार्डों के उपचुनाव परिणाम से मिलने की संभावना है।
हालांकि, इस परिणाम से तीनों नगर निगम की सत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उपचुनाव में भाजपा के हारने के बाद भी उसकी सत्ता बरकरार रहेगी। वहीं कांग्रेस भी प्रमुख विपक्षी दल बनी रहेगी। इसके अलावा आप यदि सभी वार्डों पर जीत हासिल कर भी लेती है तो वह तीसरे बड़े दल के रूप में स्थान हासिल कर सकेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, उपचुनाव परिणाम से काफी हद तक दिल्ली का राजनीतिक परिदृश्य स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं दलों के नेताओं का भी मानना है कि उपचुनाव परिणाम से जनता के रुख के बारे में मालूम हो जाएगा।
इन चुनावों से तीनों ही प्रमुख पार्टियों के बीच चल रही अस्तित्व की लड़ाई की कलई भी खुलकर सामने आ जाएगी। इसके चलते अगले वर्ष तीनों नगर निगम के होने वाले चुनाव में मतदाताओं को रिझाने की रणनीति बनाने में तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों को काफी आसानी होगी।