अमेरिकन एंबेसी के सामने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के एएससआई लालमन सिंह सिसोदिया को रौंदने वाले जयपुर यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर सिद्धार्थ भगत मामले में बड़ा खुलासा आया है। आरोपी प्रोफेसर अमेरिका के राष्ट्रपति से बात करना चाहता था। इस कारण वह अमेरिकन एंबेसी के चक्कर लगा रहा था।
प्रोफेसर को उम्मीद थी कि दूतावास के अधिकारी उनकी वहां के राष्ट्रपति से बात करवा देंगे और उसे यूएस में नौकरी मिल जाएगी। शनिवार को अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है और आरोपी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अमेरिकन एंबेसी के मेन गेट तक पहुंच गया था। ऐसे में किसी आतंकी हमले की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल समेत देश की सुरक्षा एजेंसियों ने प्रोफेसर से शुक्रवार व शनिवार को दिनभर पूछताछ की।
नई दिल्ली जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिद्धार्थ भगत जयपुर यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल लॉ पढ़ाते हैं। उनकी इच्छा थी कि वह यूएन में लॉ पढ़ाए। इस कारण वह शुक्रवार को जयपुर से सीधे दिल्ली आए। अमेरिकन एंबेसी के पास पहुंचकर पहले तो प्रोफेसर ने एंबेसी के चारों ओर चक्कर लगाया और फिर सर्विस रोड से एंबेसी के मेन गेट पहुंचने की कोशिश करने लगे।
उनकी कार की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा से ज्यादा थी। प्रोफेसर रफ्तार पर काबू नहीं कर सके और पीसीआर वैन पर तैनात एएसआई लालमन सिंह सिसोदिया को टक्कर मार दी। एएसआई जिप्सी से बाहर खड़े थे। एएसआई प्रोफेसर की कार व एंबेसी की दीवार के बीच में पीस गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
चाणक्यपुरी थाना पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ सड़क दुर्घटना की धारा न लगाकर लापरवाही बरतने से हुई मौत (आईपीसी की धारा 304 ए) की धारा लगाई है। प्रोफेसर को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने जमानत देने से इंकार दिया और आरोपी प्रोफेसर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। प्रोफेसर सिद्धार्थ ने घटना के समय शराब नहीं पी रखी थी।
मेडिकल जांच में यह पुष्टि हो गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रोफेसर सिद्धार्थ के परिवार में लोग अच्छे पदों पर हैं। उनकी एक बहन पश्चिमी बंगाल में आईएएस हैं।