राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने दिल्ली और यमुना की सेहत सुधारने के लिए शुक्रवार को एक बड़ा फैसला किया। राष्ट्रीय राजधानी के हर घर को सीवर के लिए प्रति माह कम से कम सौ रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति देनी होगी।
यह राशि संपत्ति कर और पानी के बिल में से जो भी अधिक होगा, उसके अनुपात में ली जाएगी। जो लोग पानी का बिल नहीं भरते हैं या अनधिकृत कालोनियों में रहते हैं, उन्हें सौ से पांच एक सौ रुपये के बीच में क्षतिपूर्ति देनी पड़ेगी।
एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली बेंच ने दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड, सभी नगर निगमों, छावनी बोर्ड और बिजली कंपनियों समेत सभी नागरिक प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे घरों से क्षतिपूर्ति वसूलें।
इससे फर्क नहीं पड़ता है कि घर में सीवर का कनेक्शन है या नहीं। क्षतिपूर्ति का फैसला उस प्लॉट पर हुए निर्माण से संबंध रखने वाला विभाग करेगा।