मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बाहरी दिल्ली के बवाना में शहीद गजेंद्र सिंह किसान सहायता योजना की शुरुआत की। जहां किसानों के बीच केजरीवाल ने शहीद गजेंद्र सिंह के नाम पर एक स्मारक बनाए जाने की घोषणा की, वहीं केंद्र व राज्य सरकार पर किसानों की सहायता के नाम पर भिखारी बनाने का आरोप भी जड़ा। उन्होंने अपने भाषण में भाजपा और कांग्रेस को एक ही थाली का चट्टा-बट्टा बताया। कार्यक्रम में गजेंद्र सिंह के परिजन भी पहुंचे।
केजरीवाल ने कहा कि सरकार के बाहर रहकर खूब संघर्ष किया। जनता ने भारी मतों से जिताकर भेजा लेकिन अब सरकार के अंदर आकर भी उतना ही संघर्ष करना पड़ रहा है। भाजपा शासित केंद्र सरकार दिल्ली का साथ नहीं दे रही है।
केंद्र सरकार कहती है कि पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार करें तो मत पकड़ो। जिस पुलिसकर्मी को पैसे लेते पकड़ा, उसके मामले में दिल्ली पुलिस ने एसीबी के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया। ये सब दिल्ली पुलिस नहीं कर रही है बल्कि केंद्र में बैठी भाजपा पुलिस से करा रही है। लेकिन निचली अदालत ने एसीबी का तर्क मानकर पहले तीन दिन पुलिस कस्टडी दी फिर 16 दिन हो गए। अब दिल्ली हाईकोर्ट में भी हारेंगे।
केजरीवाल ने दो-टूक कहा कि भाजपा व कांग्रेस एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। ये कहते हैं एक-दूसरे के कार्यकाल में अपना काम निकाल लेते हैं, अब आम आदमी पार्टी की सरकार है, नहीं चल पाएगा। इसलिए ये दोनो पार्टी चाहती हैं कि ‘आप’ सरकार असफल हो जाए।
किसानों ने उठाए सवाल
केजरीवाल ने बेमौसम बारिश के कारण फसल बर्बाद होने पर मुआवजा वितरण शुरू किया। जहां कुछ किसान खुश दिखे तो बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी दिखे जिन्हें मुआवजा तय करने के तरीके पर ऐतराज था।
उन किसानों का कहना है कि अधिक फसल बर्बाद हुई हैं। मुआवजा 70 फीसदी से कम कहकर मिल रहा है। हम अधिक मुआवजे की दावेदारी कैसे करें। जिन किसानों का 70 फीसदी फसल से कम नुकसान हुआ है, उन्हें एक एकड़ के बदले 14 हजार व जिनकी फसल 70 फीसदी से अधिक बर्बाद हुई है उन्हें 20 हजार रुपये का चेक दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार रुपये मुआवजा देने, बिजली के दाम आधे करने और पानी 20 हजार लीटर तक फ्री करने पर विरोधी कहते हैं, पैसा कहां से आएगा। मैं कहता हूं सरकार में पैसे की कमी नहीं, नीयत की कमी है। अब अच्छी नीयत वाली पार्टी सत्ता में आ गई है। भ्रष्टाचार कम करके पैसा बचाया है। ईमानदारी से काम करो, सारे काम हो जाते हैं।
भिखारी बनाने जैसा मुआवजा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर खुदकुशी करने वाले गजेंद्र सिंह बेशक हमारे बीच नहीं हैं लेकिन जान देकर देश व राज्य सरकार को किसान के मुद्दे पर सोचने को मजबूर किया। बेमौसम में फसल बर्बाद हुई तो सरकार का फर्ज बनता है, इतनी राशि मुआवजे में दे कि नुकसान की भरपाई हो।
कुछ महीने घर का खर्च भी चले। पड़ोसी राज्य ने शोर मचाया है, मिल जाए तो अच्छा है। कुछ राज्यों ने किसानों को मुआवजा राशि का जो चेक दिया है, वह देश की सेवा करने वाले किसानों को भिखारी बनाने जैसा है।
केजरीवाल बोले मैं जब से मुख्यमंत्री बना, कई चिट्ठी केंद्र सरकार को लिखी हैं। आज तक किसी चिट्ठी का जवाब नहीं आया। भाजपा के नेता उन चिट्ठी पर कुंडली मारकर बैठ गए। मैं इन्हें कह रहा हूं, जो मर्जी कर लो, हम सफल होंगे। हमारे साथ जनता है।