-दिल्ली सरकार के मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का रास्ता कक्षाओं से होकर गुजरता है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गाइडलाइंस 2026 भारत की शिक्षा व्यवस्था में आ रहे एक गहरे और परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है। यदि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो उसका रास्ता भारत की कक्षाओं से होकर ही निकलेगा। राष्ट्र निर्माण की नींव कक्षाओं में ही रखी जाती है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने यह बातें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (भारत सरकार) की ओर से आयोजित स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देशों के विमोचन पर कही।
विज्ञान भवन में उन्होंने कहा कि नई एसएमसी (स्कूल प्रबंधन समिति) गाइडलाइंस के तहत अब समितियां केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, सीखने के परिणाम और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी। यह गाइडलाइंस स्कूलों को सामुदायिक विकास का केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि नई गाइडलाइंस से शिक्षा में पारदर्शिता, गुणवत्ता और सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा तथा यह विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सूद ने बताया कि तीन वर्षीय विजन प्लान और वार्षिक कार्य योजना के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को स्थायित्व और स्पष्ट दिशा मिलेगी।
नई गाइडलाइंस क्लस्टर लेवल रिसोर्स शेयरिंग को बढ़ावा देंगी और स्कूलों को सामुदायिक जीवन का केंद्र बनाने का कार्य करेंगी। नई गाइडलाइंस में शामिल तीन वर्षीय विजन प्लान, वार्षिक कार्य योजना और स्पष्ट प्राथमिकताएं शिक्षा व्यवस्था को व्यक्ति आधारित नहीं, बल्कि संस्थागत और दीर्घकालिक दृष्टिकोण प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्कूल का प्रिंसिपल या शिक्षक बदल भी जाए, तब भी स्कूल की दिशा और विकास की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।