मेवात के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। पूर्व में विभाग के कई अधिकारी जेल की हवा खा चुके हैं। हाल ही में भी एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें करीब 72202 आधार लिंक फर्जी मिले है।
इसके पीछे पीडीएस में बड़ी धांधली की बू आ रही है। खुलासे के बाद से ही खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के खंड स्तर पर बैठे अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रदेश के खाद्य एवं पूर्ति मंत्री ने इस मामले के खुलासे के बाद निष्पक्ष जांच कराकर इस मामले में संलिप्त कर्मचारी व अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
प्रदेश भर में फर्जीवाड़े के 13 लाख 86 हजार मामले सामने आए हैं। जिले में यह आंकड़ा 72202 है। बता दें कि जब आधार कार्ड से पीडीएस सिस्टम को जोड़कर गरीबों को फायदा पहुंचाने की सरकार द्वारा दलील जा रही थी, तब से ही इस पर सवाल खड़े किए जा रहे थे।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर विभाग के कई निरीक्षक पहले भी जेल की हवा खा चुके हैं। अक्तूबर 2010 में यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था।
जब नूंह निवासी को पलड़ी रोड स्थित फ्लोर मिल से पुलिस ने करीब तीन सौ सरकारी गेहूं के कट्टे बेचते हुए रंगे हाथ पकडे़ थे और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक योगेंद्र नेहरा ने भ्रष्टाचार में संलिप्त विभाग के अधिकारियों को सलाखों के पीछे डाल दिया था।
क्षेत्र के बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा योजना गरीबों के लिए काफी फायदेमंद है, लेकिन इसका भरपूर फायदा तभी लोगों को मिल पाएगा।
जब सरकार भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों पर शिकंजा कसकर ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति करे। इस बारे में जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक ने बताया कि यह कोई फर्जीवाड़ा नहीं है। यह एक छोटी सी गलती है। जिसे ठीक किया जा रहा है।