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कोरोना के कारण बाजारों की रौनक फीकी, गायब हैं खरीदार-सहमे हैं दुकानदार

Thu, 19 Nov 2020 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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चांदनी चौक... भीड़ तो है पर गायब हैं खरीदार. - फोटो : amar ujala
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राजधानी में कोरोना के बढ़ते मामलों का असर पारंपरिक रूप से मनाए जाने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ पर पड़ा है। इस वजह से इस बार बाजारों में रौनक फीकी है। पिछले वर्ष के मुकाबले कुछ चीजों के दामों में जहां बढ़ोतरी हुई है तो कुछ के दामों में कमी भी हुई है। दरअसल, बुधवार से नहाय खाय के साथ छठ का महापर्व शुरू हो गया है। बाजारों में छठ पूजा की खरीददारी को लेकर रौनक नजर नहीं आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार करीब आधा कारोबार रह गया है। डर है कि यदि बृहस्पतिवार तक भी छठ के सामान की अच्छी खरीदारी नहीं हुई तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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नारियल और डगरा समेत अन्य वस्तुओं की कीमत बढ़ी छठ को लेकर खरीदारी के सामानों में इस वर्ष सूप नारियल, किराव समेत खाजा की मिठाई के दामों में बढ़ोतरी हुई है। गीता कॉलोनी स्थित दुकानदार दीपक ने बताया कि कोरोना महामारी की वजह से बाजार में छठ का सामान कम पहुंचा है। इसलिए कुछ चीजों के दाम पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़े हैं। इनमें सूप का दाम 70 रुपये है, जबकि पिछली बार यह 50 से 60 रुपये में बिका था।

नारियल की कीमत 70 रुपये है, जो पिछली बार 40 रुपये तक थी। खाजा की मिठाई पिछली बार 120 से 130 रुपये किलो तक बिकी थी और इस बार 150 से 180 रुपये तक प्रति किलो बिक रही है। पिछले वर्ष पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाला डगरा 80 से 100 रुपये में बिका था, जो इस बार 120 से 150 रुपये है। मनिया 100, नींबू 45 रुपये किलो, अनानास 50 रुपये किलो, सुतली 10 रुपये का एक पीस, आदि अदरक 10 रुपये पीस, टाप नींबू 30 रुपये व डाला 100 रुपये में बिक रहा है।
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कम हुई मिट्टी के बर्तनों की कीमत
पूजा में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के बर्तनों में पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार दाम में कमी हुई है। दुकानदार राजीव ने बताया कि पिछले वर्ष मिट्टी का बना हाथी का दाम 120 रुपये था, जो इस बार 100 रुपये का है। पिछले वर्ष कोसिया 70 से 80 में बिका था और इस बार यह 50 रुपये का है। मटके के दाम 70 से 50 रुपये रह गए हैं। दीयों की कीमत में भी पांच से 10 रुपये की गिरावट है। कोरोना की वजह से बाजार से खरीदार नदारद हैं। इस बार सामान भी कम आया है। इसलिए दुकानदार सिर्फ बचा हुआ माल निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 

अधिकांश लोगों के गांव लौटने से खाली है बाजार
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि राजधानी में पर्व पर पाबंदी को लेकर भी खरीदारी कम है। क्योंकि, अधिकांश लोग छठ पर्व मनाने को लेकर पहले ही अपने-अपने गांव का रुख कर चुके हैं। दिल्ली में अब सीमित लोग बचे हैं। यही वजह है कि जो भीड़ पिछले वर्षों में देखने को मिलती थी, वैसी इस बार नहीं है। दुकानदारों को उम्मीद है कि बृहस्पतिवार को खरना के दिन अच्छी दुकानदारी हो सकती है।
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