इसे महज इत्तफाक ही कहेंगे कि जिस डेंगू के लिए फरहान और उसके पिता डॉ. हबीब लोगों को जागरूक कर रहे थे, उसी डेंगू से फरहान जिंदगी की जंग हार गया।
पिछले कई वर्षों से फरहान अपने पिता के साथ मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को आयोजित करवा रहा था। इसी 15 अगस्त को जामिया नगर स्थित नई बस्ती में फरहान ने डेंगू जागरूकता के लिए पिता के साथ एक कार्यक्रम किया था।
उसमें ‘डेंगू बचाव ही इलाज’ लिखे पर्चे बांटे थे। उस समय शायद किसी को भी नहीं पता था कि जिस बीमारी के प्रति मासूम लोगों को आगाह कर रहा है, वही बीमारी उसकी जिंदगी लील लेगी।