डेंगू से पीड़ित महिला ऊषा ने शुक्रवार रात यशोदा
अस्पताल की इमरजेंसी में तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि
ऊषा को आईसीयू के लिए रेफर किया गया था, जबकि डॉक्टरों ने आईसीयू में बेड न
होने की बात कहकर महिला को इमरजेंसी में ही लिटाए रखा।
परिजन डॉक्टरों से
भर्ती करने की मिन्नतें करते रहे लेकिन उसे एडमिट नहीं किया गया। इसी बीच
महिला ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने मामले की लिखित शिकायत सीएम, डीएम और
सीएमओ को करने की बात कही है।
श्रीराम ने बताया कि उनकी पत्नी ऊषा को
24 सितंबर को बुखार आया था। उसी दिन वे प्रताप विहार स्थित आस्था अस्पताल
लेकर पहुंचे। ओपीडी में दवा देकर उन्हें घर लौट जाने को कहा गया।
25 सितंबर
को वे लोग फिर शाम 6 बजे अस्पताल पहुंचे और दवा लेकर घर लौट गए। घर आते ही
अचानक ज्यादा तबियत खराब होने पर दोबारा अस्पताल पहुंचे तो उनकी पत्नी को
एडमिट कर लिया गया।
इसके बाद रात दस बजे तक भी स्थिति में कोई सुधार न होने
पर डॉक्टर ने उन्हें यशोदा आईसीयू के लिए रेफर किया। वे लोग जब यशोदा
पहुंचे तो डॉक्टरों ने आईसीयू में कोई बेड न होने की बात कही और उनकी पत्नी
को इमरजेंसी में ही रखे रखा।
मृतका के पति का कहना है कि इस दौरान वे लोग
भरसक प्रयास करते रहे कि अस्पताल उनकी पत्नी को एडमिट कर ले, लेकिन एडमिट
की प्रक्रिया शुरू करने की बजाय वे लोग हमसे चक्कर कटवाते रहे।
क्या कहता है अस्पताल प्रबंधन
महिला
को अस्पताल में 10:44 पर लाया गया। जब महिला को यहां लाया गया उस समय उसकी
अंतिम सांसें ही चल रही थीं। फिर भी उसे इमरजेंसी में रखा गया, जहां
डॉक्टर उसकी जांच करते रहे। जब तक आगे की कोई कार्रवाई होती कुछ ही देर में
महिला की मौत हो गई थी। - डा. प्रियरंजन ठाकुर, यशोदा अस्पताल