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Delhi NCR News: रील्स की दुनिया में घट रही पढ़ने की आदत

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संवाद न्यूज एजेंसी
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नई दिल्ली। मोबाइल पर रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण युवाओं और बच्चों में किताबें पढ़ने, लिखने और गहराई से सोचने की आदत कम होती जा रही है। नन स्टडी ने संकेत दिए हैं कि कम उम्र में विकसित बेहतर भाषा और लेखन कौशल बुढ़ापे में डिमेंशिया और याददाश्त से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं।

अध्ययन में पाया गया कि युवावस्था में पढ़ने-लिखने और बौद्धिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले लोगों में उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की कार्यक्षमता बेहतर बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार छोटे और तेजी से बदलते डिजिटल कंटेंट की तुलना में किताबें पढ़ना, लेखन और नई चीजें सीखना मस्तिष्क को अधिक सक्रिय रखते हैं।
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मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि शॉर्ट वीडियो और रील्स तत्काल मनोरंजन तो देते हैं, लेकिन लंबे समय तक किसी विषय पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। पढ़ना, लिखना और नई चीजें सीखना मस्तिष्क में कॉग्निटिव रिजर्व विकसित करता है, जो बढ़ती उम्र में डिमेंशिया जैसी समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है। बच्चों और युवाओं को रोजाना कुछ समय किताबों और रचनात्मक गतिविधियों के लिए जरूर निकालना चाहिए।
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विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना भविष्य में मानसिक और मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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