जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान पूरी दुनिया को लुटियन की दिल्ली की खूबसूरती दिखाने के लिए लगाए गए करीब दस लाख पौधे व झाड़ियां गर्मी में दम तोड़ रहे हैं। डेढ़ माह में इसका करीब आधा हिस्सा सूख गया है। इससे कई सड़कों की हरित पट्टी वीरान सी हो गई है। यह इसके बावजूद है कि एनडीएमसी पौधों व झाड़ियों को गर्मी से बचाने के लिए टैंकरों व सबमर्सिबल पंपों से पानी उपलब्ध करा रही है, मगर भीषण गर्मी होने के कारण जमीन कुछ घंटे बाद सूख जाती है।
एनडीएमसी ने जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली इलाके को हरा-भरा बनाने के लिए सभी सड़कों व चौराहों पर ड्रैकेना, सॉन्ग ऑफ इंडिया, बुगैनविलिया, हिबिस्कस, चम्पा, फिकस, एरेका पाम, रपिस पाम, लिविस्टोन, हरा और लाल ऐक्लिफा, एस्पिडिस्ट्रा, जस्टिसिया, हैमेल और टेकोमा आदि किस्मों के 10 लाख पौधे और झाड़ियां लगाई थीं। इनके दम पर नई दिल्ली पूरी तरह हरी भरी हो गई थी और नई दिल्ली इलाका बहुत ही सुंदर दिखाई दिया था।
सम्मेलन के बाद कई माह तक एनडीएमसी ने नई दिल्ली की हरियाली को बनाए रखा, मगर मई की शुरुआत में गर्मी के तेवर कड़े होने के साथ ही नई दिल्ली इलाके में हरियाली कम होनी शुरू हो गई। मई के अंतिम सप्ताह में कई दिन तापमान 49 डिग्री तक पहुंचने और जून में भी तापमान 45 डिग्री रहने पर आधे पौधे व झाड़ियां सूख गई हैं। सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, मंडी हाउस, अकबर रोड समेत करीब-करीब सभी मार्गों पर काफी पौधे व झाड़ियां सूख गई है। सरदार पटेल मार्ग पर तो अनेक जगह हरित पट्टी में कुछ ही पौधे व झाड़ियां बची हैं।
बताया जा रहा है कि एनडीएमसी द्वारा जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान लगाए गए अधिकतर पौधे व झाड़ियां अधिक गर्मी सहन नहीं सकते हैं। इसके अलावा उन्हें गर्मी के मौसम में प्रतिदिन पानी की आवश्यकता होती है। दिल्ली में इस साल काफी अधिक गर्मी होेने और लगातार पानी नहीं मिलने के कारण यह पौधे व झाड़ियां सूख गई हैं। इतना ही नहीं, इन पौधों व झाड़ियों के सूखने का सिलसिला जारी है। एनडीएमसी के अधिकारियों के अनुसार, बारिश शुरू होने के बाद पौधों व झाड़ियों को राहत मिल पाएगी। इसके अलावा भविष्य में गर्मी सहन करने वाले और पानी की कम मांग वाले पौधे व झाड़ियां लगाई जाएंगी।