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प्रिंस हत्याकांड की पहली बरसी, मां ने कहा, ऐसा कोई दिन नहीं, जब याद नहीं आता हो बेटा

Sat, 08 Sep 2018 06:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
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prince murder case
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भोंडसी स्थित एक निजी स्कूल में प्रिंस (कोर्ट द्वारा दिया गया नाम) की निर्मम हत्या को आज एक साल पूरे हो गए हैं। इस मामले में भले आरोपी भोलू को कोर्ट व सीबीआई ने दोषी माना है, लेकिन प्रिंस के पिता बरुण ठाकुर को अब भी इंसाफ का इंतजार है। मौजूद कार्रवाई पर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा है कि अदालत में इंसाफ की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन प्रक्रिया इतनी धीमी होगी, इसका अंदाजा नहीं था। इस थका देने वाली प्रक्रिया ने पीड़ित की जगह मुजरिम जैसा अनुभव करा दिया है।

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आठ सितंबर 2017 को प्रिंस की हत्या के बाद पुलिस ने उसके स्कूल के बस ड्राइवर अशोक को आरोपी बताते हुए पेश किया था। जिस पर प्रिंस के पिता ने सवाल उठाते हुए सीबीआई से इसकी जांच कराने की मांग की थी। घटना के 15 दिन बाद मामला सीबीआई के पास चला गया। सीबीआई ने जांच में स्कूल के ही एक छात्र भोलू (कोर्ट द्वारा दिया गया नाम) को दोषी बताया और चार्जशीट फाइल की।

बरुण ठाकुर का कहना है कि कोर्ट में सीबीआई ने 5 फरवरी को चार्जशीट दायर की थी। इसमें भोलू को आरोपी बताया, लेकिन सात महीने बीतने के बाद भी मामले में ट्रायल शुरू नहीं हो सका है। सीबीआई ने अभी तक पूर्ण चार्जशीट भी दायर नहीं की है। ऐसे में इंसाफ का इंतजार हो रहा है। अगर ट्रायल सीबीआई कोर्ट में ही होना है तो इसे तत्काल गुरुग्राम कोर्ट से पंचकुला ट्रांसफर कर दिया जाए, ताकि ट्रायल जल्द हो। अभी पूर्ण इंसाफ के लिए और लड़ाई लड़नी बाकी है।
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....लगता है गुनाह मैंने किया
बकौल बरुण ठाकुर, शुरू से पता था कि कानूनी प्रक्रिया लंबी होगी, लेकिन इतनी धीमी होगी इसका पता नहीं था। सत्र न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काट-काट कर ऐसा लगता है कि गुनाह मैंने ही किया है। कभी फिंगर प्रिंट तो कभी वयस्क या किशोर को लेकर याचिका डालकर मामले को लटका दिया गया। यह दूसरे पक्ष का कानूनन अधिकार है, लेकिन सुनवाई व फैसले की गति धीमी होने से निराशा होती है। 

बाकी प्रिंस माता-पिता की गोद में महफूज रहें
बेटे को याद कर भावुक हुए पिता का दुख उनकी बातों से जाहिर हुआ। उन्होंने कहा, हमारी लड़ाई केवल एक मामले को लेकर खत्म नहीं होगी।  भले ही प्रिंस हमसे दूर चला गया लेकिन मैं चाहता हूं कि शहर के स्कूलों में पढ़ रहे हजारों प्रिंस अपने माता-पिता की गोद में हमेशा महफूज रहें। कानून और सीबीआई अपना काम कर रही है। सरकार भी इस ओर गंभीरता से कदम उठाते हुए स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर ठोस कार्रवाई करे। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका डाली हुई है, सुनवाई चल रही है।

रक्षाबंधन पर पूरा परिवार रोया था    
प्रिंस की मां सुषमा उर्फ ज्योति ठाकुर ने बताया कि एक साल में ऐसा कोई दिन नहीं बीता, जब मेरा लाडला याद नहीं आया। आज भी जब बच्चे सुबह तैयार होकर स्कूल जाते हैं तो उनमें मुझे मेरा प्रिंस दिखाई देता है। हर त्योहार, हर दिन वह याद आता है। कानून ने भले इंसाफ दिला दिया लेकिन मेरे प्रिंस को तो दोबारा नहीं लौटा सकते ना। आंसू पोंछते हुए उन्होंने बताया, रक्षाबंधन पर सबसे ज्यादा उसकी कमी महसूस हुई।

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