नए कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने दिल्ली की कई सीमाएं कब्जा रखी हैं। शनिवार को एक बार फिर केंद्र के साथ वार्ता बेनतीजा रहने पर किसानों में रोष पनप गया। बॉर्डरों पर डटे किसानों ने एलान कर दिया है कि वह आंदोलन को तेज करेंगे और बगैर मांग पूरी हुए वापस नहीं जाएंगे। ‘अमर उजाला’ टीम ने बॉर्डरों के हालात का जायजा लिया। पेश है रिपोर्ट -
दिनभर चलता रहा बैठकों का दौर
समय : 12:00 बजे, दोपहर
स्थान : गाजीपुर बॉर्डर
यहां नौ दिन से डटे आंदोलनकारी किसानों के बीच सुबह से ही बैठकों का दौर शुरू हो गया था। इसमें दोपहर दो बजे किसानों और सरकार के बीच होने वाली बैठक को लेकर चर्चा गर्म थी। जब वार्ता बेनतीजा रही तो किसानों ने आंदोलन को तेज करने के लिए हुंकार भरी। वहीं, किसान और सरकार के बीच की बैठक को देखते हुए शनिवार को गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस की कड़ी सुरक्षा कर दी गई थी। बैरिकेडिंग की नौ स्तरीय दीवार बनाई गई थी। इसके बीच में सीमेंट के बने ब्लॉक की दीवार को भी बनाया गया था, जिससे संघर्ष की स्थिति में किसानों को रोका जा सके। पहले के मुकाबले बॉर्डर पर शनिवार को अर्द्धसैनिक बल भी ज्यादा तैनात रहा। आपात वाहनों में शामिल एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई थी।
अधिक संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ पहुंचे किसान
शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से अधिक संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ पहुंचे और ट्रैक्टरों को बैरिकेडिंग के साथ लगाकर खड़ा कर दिया, जिससे आंदोलन तेज होने पर दिल्ली की सीमा की ओर कूच करने में परेशानी न हो। वहीं, अधिक संख्या में पहुंचे किसानों ने खाने-पीने की व्यवस्था के पूरे बंदोबस्त किए हुए थे। बॉर्डर पर दिनभर किसानों के विभिन्न गुटों के बीच विचार-ञविमर्श चलता रहा। दोपहर बाद हवन का आयोजन भी किया गया। किसान नेताओं का कहना था कि हवन का आयोजन केंद्र की सद्बुद्घि के लिए किया गया है, जिससे केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस ले ले और किसानों को राहत प्रदान करे।
किसान संगठन ने लगाया चार्जिंग स्टेशन
गाजीपुर बॉर्डर पर शनिवार को एक किसान संगठन ने सभी किसानों के लिए मोबाइल चार्जिंग स्टेशन की सुविधा की। यह चार्जिंग स्टेशन निशुल्क रूप से लगाया गया था, जिसे वहां लगे एक बिजली के बॉक्स के साथ कनेक्शन देकर जोड़ा गया था। इससे प्रदर्शनकारी किसानों को मोबाइल चार्ज करने में सुविधा मिली।
आम लोगों का भी मिलने लगा साथ
समय : 12.00 बजे, दोपहर
स्थान : सिंघु बॉर्डर
यहां आम दिनों के मुकाबले ज्यादा भीड़भाड़ दिखाई दे रही थी। सड़क के एक ओर पुलिस और सुरक्षा बलों का हुजूम था तो दूसरी ओर किसान जगह-जगह मंच पर सभाएं कर केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि यदि बात नहीं मानी तो उनका अगला कदम जबरन दिल्ली कूच होगा। भले ही उन्हें जान ही क्यों न देनी पड़े। हालांकि, कुछ किसानों को यकीन था कि शनिवार को किसानों और सरकार के बीच पांचवीं बैठक के बाद कोई न कोई हल जरूर निकलेगा। सिंघु बॉर्डर पार करते ही बस, ट्रैक्टर और ट्रॉलियों का जमावड़ा नजर आ रहा था। जगह-जगह लंगर चल रहे थे। छोटे-छोटे समूह में कुछ किसान अपने-अपने संगठनों के झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कहीं कोई गांव की चौपाल की तरह झुंड बनाकर हुक्का गुड़गुड़ा रहा था तो कोई अपने ट्रैक्टर की ट्रॉली में लेटकर आराम फरमा रहा था। अलीपुर, नरेला और भलस्वा के अलावा दूसरे इलाके के लोग भी यहां किसान आंदोलन में पहुंचे हुए थे। तिलक नगर से अपनी पत्नी, पांच साल के बेटे, बुजुर्ग माता-पिता के साथ आए कारोबारी मनिंदर सिंह ने बताया कि वह दिल्ली के ही रहने वाले हैं। आज जब किसान मुसीबत में हैं तो देश के हर नागरिक को किसानों का साथ देना चाहिए। शनिवार दोपहर किसानों के समर्थन में युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी पहुंचे। उन्होंने किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को इन काले कानूनों को तुरंत वापस लेना चाहिए। यदि देश का किसान सुखी नहीं रहेगा तो देश का क्या होगा
सिंघु बॉर्डर पर किसानों की जरूरत से जुड़ी हर चीज को मुहैया कराई जा रही हैं। किसानों का कहना था कि फिलहाल अभी हर घर से एक-एक आदमी ही सिंघु बार्डर पर पहुंचा है, सरकार उनकी बात नहीं मानती तो पूरे के पूरे परिवार यहां आकर दिल्ली का घेराव करेंगे।
प्रधानमंत्री से बातचीत बिना हल संभव नहीं
समय : 1.00 बजे, दोपहर
स्थान : चिल्ला बॉर्डर
प्रधानमंत्री से बातचीत के बिना किसानों की समस्या का हल संभव नहीं है। यह कहना है चिल्ला बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में बैठे भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह का। भारतीय किसान यूनियन के शनिवार सुबह दिल्ली कूच के एलान के बाद दिल्ली पुलिस ने नोएडा की ओर जाने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया। इससे पूर्व नोएडा जाने वाला रास्ता वाहनों के आवाजाही के लिए खुला हुआ था। यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को क्राउन प्लाजा चौक और अक्षरधाम होकर जाने की सलाह दी गई है। वाहनों के बंद होने के बाद लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा और वह इधर-उधर भटकते दिखे। दोपहर में दिल्ली व यूपी के पुलिस अधिकारी वहां पहुंचे और किसान नेताओं से बातचीत कर समस्या का समाधान करने की कोशिश की, लेकिन बातचीत बेअसर रही।
किसी ने सड़क तो कोई पार्क को बनाया आशियाना
चिल्ला बॉर्डर पर डटे किसान रात को सड़क या फिर पार्क में अपना आशियाना बना लेते हैं। भारतीय किसान यूनियन के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष दुष्यंत सिंह ने बताया कि ज्यादातर किसान रात को टेंट में सो जाते हैं या फिर कुछ किसान पार्क में पेड़ के नीचे अपना आशियाना बना लेते हैं। आसपास के किसान रात में अपने घर चले जाते हैं। सुबह से फिर किसान प्रदर्शन में शामिल हो जाते हैं। दिन में सभी के लिए यहां खाने का इंतजाम किया जाता है। किसान आपस में मिलकर खाना बनाते हैं।
किसानों की चेतावनी, अब सड़क पर होगी मुलाकात
समय : 2:00 बजे, दोपहर
स्थान : टीकरी बॉर्डर
यहां शनिवार को किसान आर-पार के मूड में दिखाई दिए। उनके नेता सरकार से बातचीत करने के लिए गए थे। इधर मंच पर भाषण चल रहा था। सरकार की कमजोरियां गिनाई जा रही थीं। केंद्र सरकार को किसान व राष्ट्र विरोधी बताया जा रहा था। सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को असंवैधानिक बताया जा रहा था। सामने सैकड़ों लोग बैठे मंच पर चल रहे भाषण को सुन रहे थे। हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को भी नाकामयाब बताया जा रहा था। शायद नौ दिन से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा था। तभी तो किसान पुराने जम्मू-कश्मीर राज्य से धारा-370 हटाने के सरकार के निर्णय को भी तानाशाही बताया जा रहा था। देर शाम तक बॉर्डर पर सरकार के खिलाफ इसी तरह से मजलिस जारी थी। किसानों का कहना था कि यह सरकार के साथ उनकी अंतिम बातचीत है। अब यदि सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो 8 दिसंबर को वह सड़कों पर उतरेंगे और भारत बंद करेंगे। फिर सरकार को किसानों से बातचीत करने के लिए सड़कों पर ही आना होगा।