जेवर तहसील के रुस्तमपुर गांव में शुक्रवार सुबह बारिश से बर्बाद फसल देखकर किसान वीरपाल सदमे में खेत पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा। जिस फसल से उसका घर चलता था, उसी पर उसने आखिरी सांस ली। किसान की दस बीघा फसल बरसात से बर्बाद हो गई थी। मार्च और अप्रैल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की 80 फीसदी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। इस कारण प्रदेश के कई जिलों में किसान आत्महत्या तक कर चुके हैं। सरकार से मिलने वाली मदद भी किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है।
किसान के परिजनों ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे वीरपाल कटाई के लिए फसल को देखने खेत पर गया था। वहां बारिश से चौपट हुई फसल को देखकर वह खेत में ही बेहोश होकर गिर गया। करीब एक घंटे बाद पास के खेत से भूसा लेने पहुंचे गांव के ही किसान रविंद्र और ज्ञानेंद्र ने वीरपाल को खेत में बेहोश पड़े देखा।
इसके बाद मनीराम, गौरव, भूपेंद्र और भारत उसे गांव के ही एक डॉक्टर के पास ले गए, जहां वीरपाल को मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टर जल सिंह ने बताया कि सुबह ग्रामीण वीरपाल को लेकर आए थे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
खेती से चल रही थी जीविका
किसान के बेटे मनोज ने बताया कि खेती के लिए उनके पास 10 बीघा जमीन है, जिसके दो चक अलग-अलग जगह पर हैं। गाटा संख्या 463 में 6 बीघा और गाटा संख्या 161/544 में 4 बीघा जमीन है, जो उसके पिता के नाम से ही है। पिता समेत पांच भाइयों के परिवार की जीविका का सहारा बस यह खेती ही है। बारिश से पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। 10 बीघा फसल को चौपट देखकर उन्हें सदमा लग गया, जिससे उनकी खेत पर ही मौत हो गई। कुछ रोज पहले उन्होंने खेत से होने वाली आय से ही जर्जर घर की मरम्मत कराने की बात की थी।