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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने यासीन मलिक की गैरहाजिरी पर तिहाड़ जेल प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

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नोट- जम्मू और कश्मीर संस्करणों के लिए महत्वपूर्ण
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- जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का प्रमुख यासीन मलिक तिहाड़ जेल में बंद है, आतंक की फंडिंग में उम्रकैद की सजा काट रहा
- मई 2023 में हाईकोर्ट ने एनआईए की याचिका पर मलिक को नोटिस जारी किया था और उसकी उपस्थिति मांगी थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को आतंक की फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता यासीन मलिक की वर्चुअल सुनवाई में गैरहाजिरी पर तिहाड़ जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि प्रतिवादी (मलिक) को वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष पेश होना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। खंडपीठ ने संबंधित जेल अधीक्षक से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की।
जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक तिहाड़ जेल में बंद है और आतंक फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को तय की और निर्देश दिया कि उस दिन मलिक को वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में शामिल कराएं। अदालत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मलिक की उम्रकैद की सजा को बढ़ाकर फांसी की सजा दिए जाने की मांग की गई है। मलिक ने पहले कहा था कि वह एनआईए की इस याचिका के खिलाफ खुद बहस करना चाहता है।
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मई 2023 में हाईकोर्ट ने एनआईए की याचिका पर मलिक को नोटिस जारी किया था और उनकी उपस्थिति मांगी थी। इसके बाद जेल प्रशासन ने उसे अत्यधिक जोखिम वाले कैदी बताते हुए शारीरिक पेशी के बजाय वर्चुअल पेशी की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने मंजूरी दे दी थी। गौरतलब है कि मई 2022 में ट्रायल कोर्ट ने मलिक को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मलिक ने आरोपों को स्वीकार किया था। एनआईए का कहना है कि केवल दोष स्वीकार करने के आधार पर आतंकवादी को उम्रकैद नहीं दी जा सकती और ऐसी स्थिति में सजा की नीति कमजोर पड़ जाएगी। अदालत ने जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में मलिक की वर्चुअल उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
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