हिमंता बिस्वा सरमा और निशिकांत दुबे के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषण का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू अदालत ने शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की याचिका पर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। मंदर ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषण के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने पुलिस से यह जानकारी मांगी है कि क्या मंदर ने संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, क्या अदालत के क्षेत्राधिकार में कोई कारण उत्पन्न हुआ है, क्या शिकायत से कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है और यदि हां, तो क्या लालिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार एफआईआर दर्ज की गई और जांच की गई।
मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को तय की गई है। मंदर की याचिका में सरमा के उन बयानों का जिक्र है, जिसमें उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा पुजारियों और मुल्लों को भुगतान किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा था कि भारत हिंदुओं का देश है, हिंदू सभ्यता है और पहले हिंदुओं को मिलना चाहिए। याचिका में दावा किया गया है कि ये टिप्पणियां एक विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण की श्रेणी में आती हैं। निशिकांत दुबे के खिलाफ आरोप पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी को लेकर है। दुबे ने कुरैशी की वक्फ अधिनियम संबंधी आलोचना के बाद उन्हें मुस्लिम आयुक्त कहा था और झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोटर बनाने तथा वक्फ भूमि के ऐतिहासिक स्वामित्व संबंधी टिप्पणियां की थीं। मंदर का कहना है कि ये बयान सांप्रदायिक रूप से उकसावे वाले और मुस्लिम समुदाय के प्रति शत्रुता बढ़ाने वाले हैं।